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तीन दिन से तुलाई बंद, भड़के किसानों ने किया चक्काजाम; मौके पर पहुंचे कलेक्टर ने अफसरों को लगाई सख्त फटकार

11 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
तीन दिन से तुलाई बंद, भड़के किसानों ने किया चक्काजाम; मौके पर पहुंचे कलेक्टर ने अफसरों को लगाई सख्त फटकार
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

तीन दिन से इंतजार, फिर भी तुलाई नहीं। आखिरकार सब्र टूट गया और किसानों ने सड़क जाम कर दी। अशोकनगर में हालात इतने बिगड़े कि खुद कलेक्टर जाम में फंस गए—और फिर जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम को हिला दिया।


तुलाई रुकी तो सड़क पर उतरे किसान

अशोकनगर के कोलुआ रोड स्थित खरीदी केंद्र पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। 3 दिन से तुलाई न होने और सिर्फ 2-3 ट्रालियों की धीमी प्रक्रिया ने हालात बिगाड़ दिए। दोपहर होते-होते किसानों ने ट्रैक्टर-ट्राली सड़क पर खड़ी कर चक्काजाम कर दिया। मौके पर लंबी कतार में दो दर्जन से ज्यादा ट्रैक्टर खड़े थे, जिससे रास्ता पूरी तरह जाम हो गया।


जाम में फंसे कलेक्टर, मौके पर संभाला मोर्चा

इसी दौरान Saket Malviya वहां से गुजर रहे थे और खुद जाम में फंस गए। स्थिति समझते ही वे मौके पर पहुंचे और किसानों से सीधा संवाद किया। किसानों की शिकायत सुनते ही कलेक्टर का रुख सख्त हो गया—अब कार्रवाई तय थी।


अफसरों की फोन पर लगाई क्लास

कलेक्टर ने तुरंत अधिकारियों को मौके पर बुलाया। एक अधिकारी की देरी पर उन्होंने फोन पर ही फटकार लगाते हुए पूछा—“आपको काम बोझ लग रहा है क्या?” उन्होंने साफ कहा कि जब किसान सड़क पर खड़े हैं तो जिम्मेदार अधिकारी गायब क्यों हैं। इसके बाद वे खुद किसानों के साथ खरीदी केंद्र के अंदर पहुंचे और व्यवस्थाओं की जांच की।


प्रबंधक को चेतावनी: एक भी ट्राली खड़ी नहीं दिखनी चाहिए

कलेक्टर ने खरीदी केंद्र के प्रबंधक को सख्त निर्देश दिए कि एक भी ट्रैक्टर बाहर खड़ा नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जब तक सभी किसानों की तुलाई पूरी नहीं होती, तब तक दिन-रात, छुट्टी-रविवार की परवाह किए बिना काम जारी रखें। इससे साफ हो गया कि प्रशासन अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।


QR कोड सिस्टम बना नई परेशानी

इस बार सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए QR कोड सिस्टम लागू किया है। हर बोरी पर QR कोड लगाने से उसकी पूरी जानकारी तुरंत मिल सकेगी। लेकिन जिले में 6 लाख QR कोड की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 6 हजार कोड ही उपलब्ध हो पाए हैं। इससे प्रक्रिया और धीमी हो गई है, जिससे किसानों की मुश्किल बढ़ी है।


किसानों की जुबानी दर्द

किसानों ने बताया कि वे तीन दिन से खुले में इंतजार कर रहे हैं—रात में मच्छर और दिन में तेज धूप झेलनी पड़ रही है। एक किसान ने कहा कि उनका स्लॉट खत्म होने वाला था, लेकिन तुलाई ही बंद कर दी गई। ऐसे में चक्काजाम ही आखिरी विकल्प बचा था।


जिले में खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी

जिले में चना और मसूर खरीदी के लिए 17 केंद्र बनाए गए, लेकिन अब तक सिर्फ 4 केंद्रों पर ही खरीद शुरू हो सकी है। इन केंद्रों पर अब तक सिर्फ 70 क्विंटल चना और 564 क्विंटल मसूर खरीदी जा सकी है, जबकि बाहर लंबी कतारें लगी हैं। यही वजह है कि किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है।

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