
भोपाल। मानवाधिकार दिवस पर ‘महिला सशक्तिकरण व मानवाधिकार’ विषय पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में बुधवार को कार्यक्रम हुआ। इसमें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि अधिकार और कर्त्तव्य एकदूसरे के पूरक हैं। जब हम आधिकारों के प्रति जागरुकता प्रदर्शित करते हैं तो कर्तव्य पालन का भी ध्यान रखना आवश्यक है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आधिकारों के लिए कानून बनाए गए हैं, उन्हें लिखित रूप से परिभाषित किया जा सकता है, किंतु कर्त्तव्यों का बोध करना और कराना पड़ता है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण प्राचीनकाल से ही हमारे संस्कारों में शामिल रहा है। हमारी संस्कृति में महिलाओं का स्थान सर्वोपरि रहा है। प्रचीनकाल से ही हमारी मातृ-शक्ति साहस, युद्ध-कौशल, तपस्या, त्याग और विद्वता से संपन्न रही हैं।
प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन का ध्यान रखना आवश्यक
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि महिला संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए प्रावधानों के साथ ही उनके प्रभावी क्रियान्वयन का ध्यान रखना भी आवश्यक है। हमारे समाज में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के भाव सदैव मौजूद रहे हैं। हमें पारंपरिक संस्कार और मान्यताओं में आई विकृतियों के प्रति सजग रहते हुए उनके निवारण के प्रयास तो करने ही चाहिये साथ ही उसके मूल सृजनात्मक स्वरूप और उपलब्धियों पर गर्व भी करना चाहिए।
पंचायतों में 14 लाख महिला प्रतिनिधि निर्वाचित हुईं
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समाज की छोटी-छोटी कमजोरियों के प्रति सजग और संवेदनशील हैं। उनके कुशल नेतृत्व में आज देश की 2.5 लाख से अधिक पंचायतों में 14 लाख महिला प्रतिनिधि निर्वाचित हुई हैं। इसके साथ ही सरपंच से सांसद तक हमारी निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या कई देशों की कुल जनसंख्या अधिक है। देश में 10 करोड़ बहनें 9 लाख स्व-सहायता समूहों के साथ जुड़कर उद्यमिता से समाज सेवा तक महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिए अभूतपूर्व प्रयास हुए हैं और उनके परिणाम भी अच्छे आए हैं।
सरकार महिलाओं की समस्याओं और उनके सशक्तिकरण के प्रति सजग: निर्मला भूरिया
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाओं के मानवाधिकार और सशक्तिकरण सरकारों की संवैधानिक और समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार महिलाओं की समस्याओं और उनके सशक्तिकरण के प्रति सजग और संवेदनशील है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की पूरी तरह ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू की है।
इन्होंने भी रखे अपने विचार
मानवाधिकार आयोग के सदस्य डॉ. अवधेश प्रताप सिंह, यूएन वूमेन की स्टेट हेड रे ने भी विचार व्यक्त किए। महिला एवं बाल विकास विभाग ने महिला सशक्तिकरण योजनाओं का प्रेजेन्टेशन दिया। आयोग के प्रमुख सचिव मुकेश चंद गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। आभार प्रदर्शन आयोग के उप सचिव डीएस परमार ने किया।
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