
मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटके अटल प्रोग्रेस-वे प्रोजेक्ट ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। सरकार ने अब इसे पुराने रूट पर ही बनाने का फैसला किया है, जिससे हजारों किसानों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।
404 किमी का हाईवे, तीन राज्यों को जोड़ेगा
कोटा (राजस्थान) से इटावा (उत्तर प्रदेश) तक बनने वाला 404 किलोमीटर लंबा अटल प्रोग्रेस-वे एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है।
यह हाईवे:
राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ेगा
चंबल के बीहड़ इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ेगा
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से कनेक्ट होगा
पुराने रूट पर लौटने का फैसला क्यों अहम?
पहले इस प्रोजेक्ट का रूट बदला गया था, जिससे किसानों में भारी असंतोष फैल गया था। अब सरकार ने फिर से पुराने रूट अलाइनमेंट को लागू करने का निर्णय लिया है।
इस फैसले के बाद:
कम जमीन का अधिग्रहण होगा
हजारों किसानों की खेती बच जाएगी
लंबे समय से रुका प्रोजेक्ट आगे बढ़ सकेगा
जमीन का फिर से सत्यापन शुरू
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मुरैना, श्योपुर और भिंड जिलों में जमीन का दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया है।
किन-किन क्षेत्रों में होगा असर?
मुरैना: 90 गांव
श्योपुर: 48 गांव
भिंड: 23 गांव
यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पिछले तीन साल में जमीन का मालिकाना हक बदला तो नहीं है।
कितनी जमीन जाएगी और कितना फायदा?
पुराने रूट पर 2089 किसानों की 488 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होगी
नए रूट पर (अगर लागू होता) 14,137 किसानों की 935 हेक्टेयर जमीन जाती
यानी पुराने रूट से करीब 12 हजार किसानों को राहत, 450 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन बची
मुआवजे को लेकर अभी भी असंतोष
सरकार फिलहाल किसानों को कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देने की तैयारी में है। लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि कम से कम चार गुना मुआवजा दिया जाए, अन्यथा आंदोलन फिर शुरू होगा, किसान नेताओं ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ी तो वे दोबारा सड़कों पर उतरेंगे।
चंबल के बीहड़ों में विकास की नई उम्मीद
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चंबल के उन इलाकों से गुजरेगा जो आज भी विकास से दूर हैं।
प्रमुख बातें:
150 गांव इस हाईवे से जुड़ेंगे
85 गांव बीहड़ क्षेत्र या उससे सटे हैं
कई गांवों में अभी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी नहीं है
इस हाईवे के बनने से:
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
परिवहन आसान होगा
क्षेत्र का आर्थिक विकास तेज होगा
3 साल बाद फिर शुरू हुआ प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट साल 2020 में शुरू हुआ था, लेकिन रूट बदलने के फैसले के बाद विरोध बढ़ गया और 2023 में इसे रोक दिया गया।
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