
भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच तेज की गई है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने करीब 12 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्लेम के सिलसिले में 71 अस्पतालों को जांच के दायरे में रखा है।
टीएमएस सॉफ्टवेयर के डेस्कटॉप ऑडिट में कई तरह की अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इनमें मृत व्यक्ति के नाम पर उपचार दर्ज करने और बिना चिकित्सकीय जरूरत मरीजों को आईसीयू में भर्ती दिखाने जैसे मामले शामिल हैं।
भोपाल से इंदौर तक कई जिलों के अस्पताल जांच में
जांच का दायरा किसी एक शहर तक सीमित नहीं है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा, सागर, सतना, नीमच, शाजापुर और टीकमगढ़ सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों के अस्पतालों के क्लेम की पड़ताल की जा रही है।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी अस्पतालों की ओर से पोर्टल पर दर्ज किए जाने वाले क्लेम की डिजिटल निगरानी करती है। रिकॉर्ड में असामान्य गतिविधि सामने आने पर सिस्टम अलर्ट देता है, जिसके बाद संबंधित मामलों की जांच की जाती है।
पहले भी अस्पतालों पर लग चुका है जुर्माना
आयुष्मान योजना के तहत क्लेम में गड़बड़ी की आशंका पर पहले भी कार्रवाई की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भोपाल के 25 अस्पतालों पर 2.11 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई थी।
इसके अतिरिक्त, 50 अस्पतालों पर 3.13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। कार्रवाई के तहत 18 अस्पतालों को ब्लैकलिस्ट किया गया और 15 अस्पतालों को निलंबित किया गया था।
टीएमएस ऑडिट में कैसे सामने आती हैं विसंगतियां?
ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम यानी टीएमएस में मरीज के पंजीयन से लेकर अस्पताल से छुट्टी और इलाज के भुगतान के लिए किए गए क्लेम तक का रिकॉर्ड रहता है। ऑडिट के दौरान इन जानकारियों का उपलब्ध दस्तावेजों से मिलान किया जाता है।
जांच के प्रमुख आधारों में ये स्थितियां शामिल हैं:
- मृत व्यक्ति के नाम पर इलाज दर्ज होना।
- पर्याप्त चिकित्सकीय कारण के बिना मरीज को आईसीयू में भर्ती दिखाना।
- इलाज के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों में अंतर मिलना।
इन संकेतों के आधार पर संदिग्ध क्लेम की पहचान की जाती है। इसके बाद संबंधित अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की जाती है।
हर 100 क्लेम में चार संदिग्ध मामले सामान्य सीमा
आयुष्मान भारत निरामयम के सीईओ अरविंद कुमार शाह के अनुसार, टीएमएस ने 71 अस्पतालों को संदिग्ध श्रेणी में चिह्नित किया है। अस्पताल द्वारा क्लेम दर्ज किए जाने के बाद पोर्टल पर उसकी निगरानी होती है।
शाह के मुताबिक, प्रत्येक 100 क्लेम में चार संदिग्ध मामले मिलना सामान्य सीमा के भीतर माना जाता है। जब ऐसे मामलों से जुड़े अलर्ट बढ़ने लगते हैं, तब जांच की जाती है। मौजूदा मामलों में भी सॉफ्टवेयर से मिले संकेतों के आधार पर संबंधित अस्पतालों की पड़ताल जारी है।
71 अस्पतालों के क्लेम की जांच से योजना के तहत उपचार के रिकॉर्ड और सरकारी भुगतान की निगरानी व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित हुआ है। जांच के निष्कर्षों से ही संदिग्ध मामलों में अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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