
भोपाल। आयुष्मान कार्ड होने का मतलब यह नहीं है कि मध्य प्रदेश के हर निजी अस्पताल में इस समय योजना के तहत मुफ्त इलाज मिल जाएगा। प्रदेश में 67 निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना से बाहर किए जाने के बाद मरीजों को अस्पताल चुनने से पहले उसकी मौजूदा संबद्धता जांचनी होगी।
इन अस्पतालों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के संस्थान शामिल हैं। इनमें से 21 अस्पतालों को NABH प्रमाणपत्र की शर्त पूरी करने के लिए 31 अक्टूबर तक की मोहलत दी गई है, लेकिन इस अवधि में उन्हें आयुष्मान के तहत इलाज की अनुमति अपने आप नहीं मिलेगी।
भोपाल के 27 अस्पतालों पर NABH शर्त का असर
निर्धारित गुणवत्ता प्रमाणन की शर्तें पूरी नहीं कर पाने के कारण 60 निजी अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया है। इनमें भोपाल के 27, इंदौर के 17, ग्वालियर के 9 और जबलपुर के 7 अस्पताल शामिल हैं।
NABH अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से संबंधित मानकों का प्रमाणन करता है। तय शर्तें पूरी नहीं होने के कारण इन अस्पतालों की योजना में संबद्धता प्रभावित हुई है।
21 अस्पतालों को 31 अक्टूबर तक का समय
निजी अस्पताल संचालकों और शासन के बीच चर्चा के बाद 21 अस्पतालों को NABH प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। इस सूची में तीन शहरों के अस्पताल शामिल हैं।
शहरवार संख्या इस प्रकार है:
- भोपाल: 10 अस्पताल
- ग्वालियर: 8 अस्पताल
- इंदौर: 3 अस्पताल
इन अस्पतालों को प्रमाणपत्र लेने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय मिला है। लेकिन दोबारा योजना में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी होने तक आयुष्मान योजना के तहत उपचार की सुविधा बहाल नहीं होगी।
तीन अस्पताल छह महीने से नहीं कर रहे थे इलाज
कार्रवाई के पीछे एक वजह यह भी रही कि तीन निजी अस्पताल पिछले छह महीने से एमपी-एबीएन के तहत मरीजों का उपचार नहीं कर रहे थे। इनमें भोपाल के दो और इंदौर का एक अस्पताल शामिल है।
इसके अलावा, भोपाल के तीन अस्पतालों ने प्रमाणपत्र से जुड़े जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए थे। एक अन्य अस्पताल पर गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
उपलब्ध जानकारी में बाकी पांच अस्पतालों को योजना से बाहर करने के कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
प्रदेश में 813 निजी अस्पताल योजना से जुड़े
मध्य प्रदेश में एमपी-एबीएन के तहत कुल 1,953 सरकारी और निजी अस्पताल उपचार सेवाएं देते हैं। इनमें 813 निजी अस्पताल शामिल हैं।
भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर को मिलाकर योजना से जुड़े निजी अस्पतालों की संख्या 423 बताई गई है। संबद्धता में बदलाव होने पर मरीजों को अपने इलाज के लिए दूसरे पात्र अस्पताल का विकल्प चुनना पड़ सकता है।
आयुष्मान कार्डधारक अस्पताल जाने से पहले क्या करें?
योजना से बाहर हुए अस्पतालों में दोबारा संबद्धता मिलने तक आयुष्मान के तहत इलाज नहीं हो सकेगा। इसलिए मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने या उपचार शुरू कराने से पहले योजना की मौजूदा स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।
ध्यान रखने वाली बातें:
- अस्पताल की आयुष्मान योजना में वर्तमान संबद्धता की जांच करें।
- जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे संबद्ध अस्पताल का विकल्प तलाशें।
- केवल कार्ड होने के आधार पर किसी अस्पताल में योजना के तहत इलाज मिलने की धारणा न बनाएं।
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