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सीएम डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से एमपी के नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को मिली रफ्तार, गडकरी ने की खुलकर तारीफ

07 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सीएम डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से एमपी के नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को मिली रफ्तार, गडकरी ने की खुलकर तारीफ

सीएम डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से एमपी के नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को मिली रफ्तार, गडकरी ने की खुलकर तारीफ

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश की सड़कों पर अब सिर्फ गाड़ियां ही नहीं दौड़ेंगी, बल्कि विकास की रफ्तार भी तेज होती दिखेगी। राजधानी दिल्ली में हुई एक अहम बैठक के बाद प्रदेश की कई अटकी हुई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को नई जिंदगी मिल गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लगातार फॉलोअप और गंभीर कोशिशों का असर अब साफ नजर आने लगा है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने खुद आगे बढ़कर सीएम के प्रयासों की सराहना की और अफसरों को लंबित प्रोजेक्ट्स जल्द पूरे करने के निर्देश दिए।


समीक्षा बैठक में तय हुई नई कार्ययोजना

नई दिल्ली में हुई इस हाई लेवल मीटिंग में मध्यप्रदेश में चल रही और प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक का फोकस उन अड़चनों पर रहा, जिनकी वजह से प्रोजेक्ट्स वर्षों से अटके पड़े थे – जैसे भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण स्वीकृति, वन विभाग की अनुमति और तकनीकी क्लियरेंस। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने साफ कहा कि अगर ये बाधाएं समय पर दूर नहीं हुईं तो प्रदेश के विकास की रफ्तार थम जाएगी। इस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें और तय समय-सीमा में मंजूरियां दिलाएं।


क्यों जरूरी है एमपी में हाईवे नेटवर्क का विस्तार?

बैठक में एक अहम आंकड़ा सामने आया। देश में जहां औसतन सड़क घनत्व 201.28 किलोमीटर प्रति 100 वर्ग किमी है, वहीं मध्यप्रदेश में यह सिर्फ 162.20 किलोमीटर है। यानी प्रदेश में सड़कें देश के औसत से काफी कम हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया कि उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी के लिहाज से मध्यप्रदेश देश का दिल है, लेकिन इसके बावजूद यहां नेशनल हाईवे नेटवर्क अपेक्षाकृत कमजोर है। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एमपी में हाई-स्पीड कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल रूट और एक्सप्रेस-वे का तेजी से निर्माण बेहद जरूरी है। इसी दिशा में एमपी रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन 4 लेन और 6 लेन के राज्य राजमार्गों के साथ-साथ नए एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।


अटल पथ और चंबल विकास परियोजना को मिली नई जान

प्रदेश की बहुप्रतीक्षित अटल पथ परियोजना को भी इस बैठक में हरी झंडी मिलती नजर आई। इसके साथ ही चंबल क्षेत्र विकास परियोजना पर भी अहम फैसला लिया गया। 2017 में शुरू की गई इस परियोजना का मकसद चंबल के पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ना था। पहले इसका रूट चंबल बीहड़ और अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजर रहा था, जिस पर पर्यावरणीय आपत्तियां आईं। बाद में इसे NHAI को सौंपा गया। अब पर्यावरण प्रभाव आकलन समिति (EAC) के निर्देशों के मुताबिक परियोजना के संरेखण में बदलाव किया जा रहा है ताकि जैव विविधता और वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे। सरकार ने साफ कहा है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखा जाएगा।


टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर: जंगल से जुड़ा विकास मॉडल

मध्यप्रदेश की पहचान सिर्फ खेती या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके जंगलों और बाघों से भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर परियोजना को भी नई गति दी गई है। इस कॉरिडोर के तहत पेंच से कान्हा, कान्हा से बांधवगढ़ और बांधवगढ़ से पन्ना टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले करीब 625 किलोमीटर लंबे मार्गों का उन्नयन किया जाएगा। इससे पर्यटकों को सुरक्षित सफर मिलेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और पर्यटन उद्योग को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा।


एमपी की सड़कों से बदलेगी अर्थव्यवस्था की तस्वीर

सीएम डॉ. मोहन यादव का मानना है कि मजबूत सड़क नेटवर्क सिर्फ ट्रैफिक नहीं संभालता, बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनता है। बेहतर सड़कों से कृषि उत्पाद तेजी से मंडियों तक पहुंचेंगे, इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई ताकत मिलेगी। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह समेत केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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