
भोपाल। मध्यप्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPOs) का मैदानी नेटवर्क तैयार किया गया है। सरकार अब अधिक प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर स्थानीय आंकड़ों के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई की रणनीति पर काम करेगी।
भोपाल की प्रशासन अकादमी में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में कानून के पालन, त्वरित हस्तक्षेप और विभागों के आपसी समन्वय पर अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश के लिए शासन, प्रशासन और समाज की साझा भूमिका पर जोर दिया।
बाल विवाह को लेकर मंत्री निर्मला भूरिया ने क्या कहा
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि बाल विवाह का असर केवल विवाह की उम्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार प्रभावित होते हैं।
उन्होंने CMPOs से कानून लागू करने के साथ सामाजिक बदलाव में भी भूमिका निभाने की अपील की। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण से हासिल जानकारी का असर वास्तविक रूप से मैदानी कार्रवाई में दिखाई देना चाहिए।
PCMA 2006 के तहत समय पर हस्तक्षेप पर जोर
प्रशिक्षण का उद्देश्य बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (PCMA) को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए अधिकारियों को तैयार करना रहा। इसमें बाल विवाह की सूचना मिलने पर समयबद्ध हस्तक्षेप, संवेदनशील कार्रवाई और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल पर जोर दिया गया।
मंत्री भूरिया के अनुसार, बाल विवाह की रोकथाम के लिए केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। परिवारों तक शिक्षा, परामर्श, सामाजिक सहयोग और आजीविका के अवसरों के माध्यम से भी पहुंचना जरूरी है।
NFHS-6 में बाल विवाह के आंकड़े घटे
मंत्री ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि 20-24 वर्ष की महिलाओं में 18 साल से पहले विवाह का अनुपात 23.1 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत हुआ है।
उन्होंने भारत सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ को बाल विवाह उन्मूलन को राष्ट्रीय प्राथमिकता देने वाला अभियान बताया और मध्यप्रदेश में लगातार प्रयास मजबूत करने की बात कही।
35 हजार से ज्यादा CMPOs की जिम्मेदारी तय
प्रदेश में अलग-अलग विभागों से 35 हजार से अधिक अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में नामित किया गया है।
इनकी व्यवस्था जिला, अनुभाग, तहसील, विकासखंड, सेक्टर, ग्राम और नगरीय क्षेत्रों तक की गई है। उद्देश्य यह है कि सूचना मिलने के बाद कार्रवाई के लिए मामला दूरस्थ प्रशासनिक स्तर तक पहुंचने का इंतजार न करे।
‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल को बढ़ाने की तैयारी
महिला एवं बाल विकास विभाग ने ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल शुरू की है। इसके तहत उन गांवों को मान्यता दी जा रही है, जहां पिछले एक वर्ष में कोई बाल विवाह नहीं हुआ है।
मंत्री के अनुसार यह पहल समुदाय को बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण से जोड़ने का माध्यम है।
लाड़ली लक्ष्मी योजना का भी किया उल्लेख
निर्मला भूरिया ने मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के उस प्रावधान का उल्लेख किया, जिसके तहत 18 वर्ष से पहले विवाह होने पर लाभ नहीं मिलने की व्यवस्था है।
उन्होंने इसे बालिकाओं को शिक्षा से जोड़े रखने और परिवारों को बाल विवाह से दूर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
देवउठनी ग्यारस से पहले बढ़ानी होगी तैयारी
मंत्री ने अधिकारियों को देवउठनी ग्यारस जैसे संवेदनशील अवसरों को देखते हुए पहले से तैयारी तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जोखिम वाले परिवारों से संपर्क करते समय गरीबी, सामाजिक दबाव, असुरक्षा और अवसरों की कमी जैसी परिस्थितियों को समझना होगा। कानूनी कदमों के साथ परामर्श और सामाजिक सहयोग भी जरूरी है।
हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर होगी विशेष निगरानी
महिला एवं बाल विकास आयुक्त संदीप जी.आर. ने कहा कि अब बाल विवाह प्रभावित क्षेत्रों में हॉटस्पॉट आधारित रणनीति अपनाने की जरूरत है।
जिन ग्राम पंचायतों, विकासखंडों और जिलों में घटनाएं ज्यादा हैं, वहां उपलब्ध आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर योजनाबद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्थानीय स्तर पर पहचान, रोकथाम और आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिकारियों की नियुक्ति का भी उल्लेख किया।
पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग पर जोर
संदीप जी.आर. ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अलावा राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग की भी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि पुलिस और जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग के बिना बाल विवाह की रोकथाम के प्रयास पूरे नहीं हो सकते। इसी समन्वय को मजबूत करने के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
BBBP और PCMA के प्रभावी क्रियान्वयन की अपील
प्रशिक्षण में अधिकारियों से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP) योजना की जिला कार्ययोजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने और PCMA, 2006 के सुदृढ़ प्रवर्तन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
पंचायतों को सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश
पंचायत एवं ग्रामीण विकास के संचालक छोटे सिंह ने कहा कि पंचायतों की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है।
उन्होंने पंचायत विकास योजनाओं और ग्राम सभाओं में बाल विवाह रोकथाम को प्रमुखता देने की बात कही। ग्राम सभाओं में इस विषय पर चर्चा कराने का सुझाव भी दिया गया।
विशेष पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार ने प्रत्येक ब्लॉक और क्षेत्र में बाल विवाह पूरी तरह रोकने की दिशा में काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने CMPOs के काम की नियमित समीक्षा और जिम्मेदारियां स्पष्ट करने पर जोर दिया।
यूनिसेफ ने किशोर सशक्तिकरण को बताया जरूरी
यूनिसेफ के राज्य प्रमुख विलियम हेनलोन जूनियर ने किशोरावस्था को भविष्य निर्माण का अहम चरण बताया।
उन्होंने कहा कि किशोर-किशोरियों को शिक्षा से जोड़े रखना, सुरक्षित वातावरण देना, जीवन कौशल सिखाना और जीवन से जुड़े निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ाना बाल विवाह की रोकथाम के लिए जरूरी है।
गाइडलाइन और प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मंत्री निर्मला भूरिया ने यूनिसेफ की ओर से प्रकाशित बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम संबंधी मार्गदर्शिका और प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन किया।
उन्होंने परिसर में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में यंग चैम्पियंस हुमा ख़ान और आशु सुंदरी ने अपने अनुभव साझा किए।
बाल विवाह रोकथाम अभियान के प्रमुख तथ्य
35 हजार से अधिक CMPOs की तैनाती।
करीब 60 हजार शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों से जुड़े 50 लाख विद्यार्थियों की सहभागिता वाला संदर्भ।
NFHS-5 में 23.1% से घटकर NFHS-6 में 20% हुआ 18 वर्ष से पहले विवाह का अनुपात।
PCMA, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रशिक्षण।
‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल के तहत एक साल तक बाल विवाह नहीं होने वाले गांवों को मान्यता।
जिला से ग्राम और नगरीय स्तर तक CMPOs की मौजूदगी।
राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास एवं आवास, पुलिस और जिला प्रशासन के समन्वय पर जोर।
देवउठनी ग्यारस को देखते हुए रोकथाम की तैयारियां तेज करने की अपील।
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