
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर विकसित करने की पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रशासनिक टीमें गांवों में पहुंचकर स्थानीय जरूरतों का आकलन कर रही हैं।
इस अभियान में ग्रामीणों की राय के आधार पर विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और आजीविका से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने के लिए अधिकारियों को 14 दिनों में आवंटित गांवों का दौरा पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
चार विकासखंडों में पहुंचीं प्रशासनिक टीमें
बालाघाट जिले के बैहर, बिरसा, लांजी और किरनापुर विकासखंडों के चिह्नित गांवों को चार क्लस्टर में बांटा गया है। अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को गांवों की जिम्मेदारी सौंपकर उपलब्ध सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
26 और 28 अक्टूबर को अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा कर जरूरतों, विकास की संभावनाओं और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़े पहलुओं का जायजा लिया। जुटाई गई जानकारी के आधार पर गांवों के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
26 अक्टूबर को इन गांवों में हुआ दौरा
लांजी एसडीएम आदित्य नारायण तिवारी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने कट्टीपार, सतोना, बरगुड़ और देवरबेली गांवों का भ्रमण किया। बैहर एसडीएम अनिकेत शांडिल्य की टीम दड़ेकसा, बिलालकसा, सोनगुड्डा, लूद, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिठरी पहुंची।
किरनापुर क्षेत्र में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री मनोज धुर्वे ने सीतापार और बोरवन गांवों में ग्रामीणों से बातचीत की। सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग शकुंतला डामोर ने उकवा-बिठली क्षेत्र के छात्रावासों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
दौरे में दूसरे विभागों के अधिकारी भी शामिल रहे। इनमें उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. घनश्याम परते, उप संचालक मत्स्योद्योग पूजा रोडगे और सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक जीपी बर्मन अपनी-अपनी टीमों के साथ संबंधित क्षेत्रों में पहुंचे।
28 अक्टूबर को कलेक्टर ने भी किया ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा
कलेक्टर आदित्य सिंह ने 28 अक्टूबर को लांजी विकासखंड की ग्राम पंचायत देवरबेली के अंतर्गत बरगुड़-सतोना, केराडीह, सायर और संदूका गांवों का दौरा किया। यहां उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थानीय जरूरतों की जानकारी ली।
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम किरनापुर विकासखंड के छिंदीकुआ, बोरवन, सकरीटोला और सिरियाटोला गांवों में पहुंची। बिरसा विकासखंड के अडोरी, कुंडेकसा और बोंदारी तथा बैहर विकासखंड के लातरी, बम्हनी और सारद गांवों में भी विभिन्न विभागों की टीमों ने भ्रमण किया।
सड़क, पानी, बिजली और स्कूलों की जरूरतों का आकलन
प्रशासन का जोर गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति समझकर सुधार के प्रस्ताव तैयार करने पर है। अधिकारियों को यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि किन क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी है और किन कामों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्रमुख रूप से इन क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है:
* सड़क, पुल और पुलिया की उपलब्धता
* पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था
* स्कूल और आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति
* बिजली की सुविधा
* शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं
* सरकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों तक लाभ की पहुंच
इन जानकारियों के आधार पर अधोसंरचना विकास और मौजूदा सरकारी सेवाओं में सुधार के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। संबंधित विभागों को पात्र लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी निर्देशित किया गया है।
खेती से लेकर डेयरी और मत्स्यपालन तक रोजगार पर जोर
गांवों में आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
विभागीय अधिकारियों को ग्रामीणों और युवाओं की रुचि के अनुरूप अवसर तलाशने को कहा गया है। इसका उद्देश्य गांवों में ही आय के साधन विकसित करना और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद करना है।
14 दिनों में रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश
कलेक्टर आदित्य सिंह ने अधिकारियों को तय 14 दिन की अवधि के भीतर आवंटित गांवों का दौरा पूरा करके विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विकास कार्यों के प्रस्ताव आगे बढ़ाए जाएंगे।
अभियान में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ युवाओं और जनजातीय समुदाय के लोगों के लिए शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। लक्ष्य चिह्नित गांवों को सरकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों से जोड़ना है।
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