
रिपोर्ट : अतुल जैन
भोपाल। शिवपुरी जिले के बामौरकलां में सड़क किनारे अस्थायी अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने बुलडोजर चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शाम करीब 5 से 5:30 बजे शुरू हुआ अभियान देर तक जारी रहा। अचानक हुई इस कार्रवाई से बाजार में हलचल मच गई और दुकानदारों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
कार्रवाई के पीछे प्रशासन ने लगातार लगने वाले जाम को वजह बताया है। दूसरी तरफ कस्बे के लोगों का सवाल है कि वर्षों से बनी इस समस्या पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया गया? कलेक्टर अर्पित वर्मा के बामौरकलां में जाम में फंसने के बाद प्रशासन की सक्रियता को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं।
एसडीएम और तहसीलदार की मौजूदगी में चला बुलडोजर
अतिक्रमण हटाने के अभियान में पिछोर एसडीएम ममता शाक्य, खनियांधाना तहसीलदार निशिकांत जैन और बामौरकलां थाना प्रभारी कुसुम गोयल मौजूद रहीं। प्रशासनिक अमले के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए थे। बुलडोजर की मदद से सड़क किनारे किए गए अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने मौके पर रहकर अभियान की निगरानी की।
क्या कलेक्टर के जाम में फंसने के बाद हुई कार्रवाई?
बामौरकलां में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर एक चर्चा यह भी है कि शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा जब शिवपुरी से चंदेरी जा रहे थे, तब उन्हें कस्बे में जाम का सामना करना पड़ा था। इसके बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान शुरू किया। हालांकि, कलेक्टर के जाम में फंसने और प्रशासन की कार्रवाई के बीच सीधे संबंध की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एसडीएम बोलीं- जनता को जाम से राहत दिलाना प्राथमिकता
पिछोर एसडीएम ममता शाक्य ने कार्रवाई को जनहित से जुड़ा अभियान बताया। उनका कहना है कि बामौरकलां में सड़क पर अस्थायी अतिक्रमण बढ़ने से यातायात बाधित हो रहा था और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता था। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि अभियान में स्थायी निर्माणों को नहीं तोड़ा गया है। प्रशासन ने केवल सड़क पर आवागमन के लिए जगह साफ कराई है।
नोटिस और मुनादी के बिना कार्रवाई पर उठे सवाल
अचानक बुलडोजर पहुंचने से दुकानदारों और ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने से पहले उन्हें किसी तरह की सूचना नहीं दी गई। व्यापारियों ने प्रशासन से सवाल किए कि कार्रवाई की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई और दुकानों के बाहर रखा सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय क्यों नहीं मिला। उनकी मांग है कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में प्रभावित लोगों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
त्योहार के दौरान कार्रवाई से छोटे दुकानदार परेशान
स्थानीय व्यापारियों ने त्योहार के समय अभियान चलाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि छोटे दुकानदारों की आजीविका सीमित कारोबार पर निर्भर है और अचानक कार्रवाई से उनके सामने आर्थिक नुकसान का खतरा पैदा हो गया। व्यापारियों का मानना है कि यातायात सुधारने के लिए प्रशासन पहले सूचना देकर और व्यवस्थित तरीके से अभियान चला सकता था।
स्थायी समाधान के लिए पार्किंग और निगरानी की मांग
बामौरकलां में जाम की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अतिक्रमण हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए नियमित निगरानी, व्यवस्थित पार्किंग और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था जरूरी है। लोगों को आशंका है कि अभियान खत्म होने के बाद फिर से सड़क किनारे अतिक्रमण शुरू हो सकता है।
एसडीएम ममता शाक्य ने बताया आगे भी जारी रहेगा अभियान
कार्रवाई को लेकर एसडीएम ममता शाक्य ने कहा कि प्रशासन नियमों के तहत काम कर रहा है। उनके मुताबिक, यह पूरा क्षेत्र बामौर के तालाब का है और यहां लगातार अतिक्रमण होने से सड़क पर जाम की स्थिति बन रही थी। उन्होंने कहा कि अभियान शाम 5 से 5:30 बजे के आसपास शुरू किया गया था। रात में कार्रवाई शुरू होने की बात सही नहीं है। प्रशासन ने अभी केवल अस्थायी अतिक्रमण हटाकर सड़क को साफ कराया है, किसी स्थायी अतिक्रमण को नहीं हटाया गया है।
एसडीएम ने यह भी कहा कि लोगों के सहयोग से यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य आम जनता को जाम से राहत दिलाना है।
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