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बामौर कलां में हनुमान जन्मोत्सव पर उमड़ा आस्था का सैलाब — तीन डीजे, पुष्प वर्षा और जयघोषों से गूंजा पूरा गांव

02 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
बामौर कलां में हनुमान जन्मोत्सव पर उमड़ा आस्था का सैलाब — तीन डीजे, पुष्प वर्षा और जयघोषों से गूंजा पूरा गांव
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

हनुमान जयंती पर बामौर कलां में जो नजारा देखने को मिला, वह बरसों याद रहेगा। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेतृत्व में निकली भव्य शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु सड़कों पर उतर आए और पूरा गांव "जय बजरंगबली" के जयघोषों से गूंज उठा।


प्राचीन मंदिर से हुई भव्य शोभायात्रा की शुरुआत

उत्सव का आगाज ग्राम के ऐतिहासिक श्री हनुमान जी मंदिर, पांडे बावड़ी सरकार से हुआ। विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के साथ शोभायात्रा रवाना हुई, तो भक्ति और श्रद्धा का ऐसा वातावरण बना कि हर आंख नम हो गई। यात्रा में तीन डीजे की गूंजती धुनों पर युवा और बच्चे झूमते रहे। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे — हर उम्र के श्रद्धालु इस यात्रा का हिस्सा बने। बहुत दिनों बाद बामौर कलां में इतनी विशाल शोभायात्रा देखने को मिली।


पूरे नगर से गुजरी यात्रा, जगह-जगह हुई पुष्प वर्षा

शोभायात्रा बस स्टैंड, बांके बिहारी मंदिर, माता मंदिर, तालाब पुरा, मेन मार्केट, पीपल चौक, जैन मंदिर और नरसिंह मंदिर तक पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर खड़े होकर पुष्प वर्षा से यात्रा का स्वागत किया। भजन-कीर्तन करती भक्तों की टोली पूरे मार्ग पर बजरंगबली के गुणगान में लीन रही। माहौल ऐसा था जैसे पूरा गांव एक साथ एक ही लय में धड़क रहा हो।


रंगोली, दीप और चमचमाती गलियां — गांव सजा दुल्हन की तरह

इस उत्सव की एक और खास बात रही — ग्रामवासियों ने अपने घरों के बाहर आकर्षक रंगोलियां सजाईं और दीप जलाकर भगवान का स्वागत किया। ग्राम पंचायत की पहल से प्रत्येक चौराहा, गली और मोहल्ला साफ-सुथरा और चमचमाता नजर आया। पुलिस व्यवस्था भी पूरे आयोजन के दौरान सराहनीय रही, जिसके कारण यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रही।


एकता और भाईचारे का संदेश — सभी वर्ग हुए एकजुट

इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही — समाज के हर वर्ग की भागीदारी। धर्म, जाति और उम्र की सीमाएं पार कर बामौर कलां के हर भक्त ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। कार्यक्रम ने यह साबित किया कि धार्मिक आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती — यह आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे को भी मजबूत करती है।


प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन

शोभायात्रा के मंदिर परिसर में वापस लौटने पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजकों और ग्रामवासियों दोनों को इस सफल और अनुकरणीय आयोजन के लिए सराहना मिली।

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