
रिपोर्ट : अतुल जैन
शिवपुरी। बामौर कलां कस्बे में अधिकृत पेट्रोल पंपों के बावजूद कथित तौर पर पेट्रोल-डीजल की अनधिकृत बिक्री और रिहायशी क्षेत्रों में ज्वलनशील ईंधन रखने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले को सुरक्षा और वैध कारोबार, दोनों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए जांच की मांग की है।
स्थानीय दावों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की सीमा से ड्रम और कैनियों में ईंधन लाकर कस्बे में बेचा जा रहा है। मामला सामने आने के बाद एसडीओपी पिछोर प्रशांत शर्मा ने संबंधित प्रभारी से जानकारी लेकर जांच कराने की बात कही है, जबकि बामौर कलां थाना प्रभारी संजय लोधी ने कार्रवाई के लिए पुलिस की तैयारी जताई है।
दो अधिकृत पंपों के बीच कथित अवैध बिक्री का आरोप
बामौर कलां में वर्तमान में 2 अधिकृत पेट्रोल पंप संचालित होने की जानकारी दी गई है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर बिना अधिकृत व्यवस्था के पेट्रोल और डीजल बेचे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ लोग यूपी सीमा की नजदीकी का लाभ उठाकर वहां से ईंधन लाते हैं। कथित तौर पर ड्रम और कैनियों के माध्यम से इसे कस्बे में ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।
रिहायशी इलाके में ईंधन रखने पर सुरक्षा चिंता
मामले का सबसे गंभीर पहलू कथित ईंधन भंडारण को लेकर है। यदि आबादी वाले क्षेत्र में बड़ी मात्रा में पेट्रोल या डीजल बिना निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के रखा जा रहा है, तो स्थानीय नागरिकों के लिए आग और अन्य दुर्घटनाओं का खतरा पैदा हो सकता है। पेट्रोल-डीजल के भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित वैधानिक तथा सुरक्षा प्रावधानों का पालन जरूरी होता है। इसी वजह से स्थानीय नागरिक संबंधित स्थानों की जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
गूडर की आगजनी के बाद उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर गूडर गांव में हुई आगजनी की घटना का भी संदर्भ दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि ईंधन के कथित असुरक्षित भंडारण और लापरवाही से जुड़ी घटनाओं के बाद प्रशासन को संभावित जोखिम वाले स्थानों की पहले ही जांच करनी चाहिए। नागरिकों का सवाल है कि यदि बामौर कलां में भी ज्वलनशील पदार्थ असुरक्षित तरीके से रखे जाने की पुष्टि होती है, तो किसी दुर्घटना से पहले उसे हटाने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू की जाती।
वैध पेट्रोल पंप संचालकों के सामने भी सवाल
अधिकृत पंप संचालक लाइसेंस और निर्धारित सुरक्षा नियमों के तहत ईंधन कारोबार करते हैं। कथित तौर पर बिना अनुमति ईंधन बेचने की स्थिति में ऐसे कारोबार की वैधता के साथ-साथ अधिकृत कारोबार पर पड़ने वाले असर की भी जांच जरूरी हो जाती है। स्थानीय स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि कथित ईंधन की खरीद, परिवहन, स्रोत और बिक्री की पूरी श्रृंखला की पड़ताल की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि ईंधन कहां से आ रहा है और किन परिस्थितियों में इसकी बिक्री हो रही है।
यूपी सीमा से आने वाले ईंधन की भी जांच की मांग
नागरिकों ने प्रशासन से यह पता लगाने की मांग की है कि उत्तर प्रदेश से कथित रूप से लाया जा रहा पेट्रोल-डीजल किस माध्यम से बामौर कलां पहुंच रहा है।
जांच में इन बिंदुओं को शामिल करने की मांग की गई है—
- ईंधन का स्रोत क्या है?
- कितनी मात्रा में पेट्रोल-डीजल लाया जा रहा है?
- इसे कहां और किस तरह रखा जाता है?
- बिक्री करने वालों के पास वैध अनुमति है या नहीं?
- परिवहन के दौरान नियमों का पालन हो रहा है या नहीं?
एसडीओपी ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच की बात कही
बामौर कलां में कथित ईंधन कारोबार का मुद्दा सामने आने पर पिछोर एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने संबंधित प्रभारी को निर्देश देकर पूरे मामले को दिखवाने की बात कही। उनके बयान का आशय है कि शिकायत की जानकारी मिलने के बाद संबंधित स्तर पर इसकी जांच कराई जाएगी।
थाना प्रभारी बोले- कार्रवाई के लिए तैयार
बामौर कलां थाना प्रभारी संजय लोधी ने भी मामले में कार्रवाई को लेकर पुलिस की तत्परता जताई है। उनका कहना है कि यदि संबंधित अधिकारी कार्रवाई करते हैं तो पुलिस सहयोग के लिए तैयार है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि कथित अवैध ईंधन बिक्री और भंडारण की वास्तविक स्थिति जांच में सामने आती है या नहीं।
प्रशासन के सामने तीन बड़े सवाल
मामले में अब मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं—
1. क्या बामौर कलां में बिना वैध अनुमति पेट्रोल-डीजल की बिक्री हो रही है?
2. क्या आबादी के बीच ज्वलनशील ईंधन का असुरक्षित भंडारण किया जा रहा है?
3. क्या यूपी से कथित तौर पर आने वाले ईंधन के स्रोत और परिवहन की जांच होगी?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि किसी संभावित दुर्घटना के बाद जांच शुरू करने के बजाय आरोपों की अभी निष्पक्ष पड़ताल की जाए। जांच में यदि अनियमितता मिलती है तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
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