
रिपोर्ट : अतुल जैन
शिवपुरी के बामौर कलां में पुलिस का अनोखा अंदाज देखने को मिला। यहां नियम तोड़ने पर चालान नहीं, बल्कि नियम मानने वालों को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया गया। यह पहल लोगों को हैरान भी कर रही है और प्रेरित भी। इस गांधीगिरी वाले अभियान ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक नया संदेश दिया है।
बस स्टैंड से चौराहे तक चला अभियान
शिवपुरी जिले के बामौर कलां में यह अभियान बस स्टैंड से हर्सरा चौराहे तक चलाया गया। थाना प्रभारी संजय लोधी खुद सड़क पर उतरे और पुलिस टीम के साथ वाहन चालकों को रोका। जो लोग हेलमेट पहनकर आए थे या सीट बेल्ट लगाए थे, उन्हें फूल माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
10 मई तक चलेगा विशेष अभियान
यह पहल प्रदेशभर में चल रहे हेलमेट जागरूकता पखवाड़ा (26 अप्रैल से 10 मई) के तहत की जा रही है। सुबह करीब 11 बजे से शुरू हुए इस अभियान में पुलिस के साथ स्थानीय नागरिक और प्रशासनिक प्रतिनिधि भी शामिल रहे।
नियम तोड़ने वालों का नहीं काटा चालान
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ तुरंत चालान नहीं किया गया। उन्हें रोककर समझाइश दी गई, ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी गई और भविष्य में सावधानी बरतने की अपील की गई। इस सॉफ्ट अप्रोच ने लोगों के बीच पुलिस की छवि को और सकारात्मक बनाया है।
दुकानदारों को भी बनाया भागीदार
अभियान में केवल वाहन चालक ही नहीं, बल्कि बस स्टैंड क्षेत्र के दुकानदारों को भी जोड़ा गया। जो दुकानदार नियमों के प्रति जागरूक दिखे, उन्हें भी माला पहनाकर सम्मानित किया गया। पुलिस ने उनसे अपील की कि वे अपने ग्राहकों को भी हेलमेट और ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करें—ताकि यह संदेश और आगे बढ़े।
“छोटी लापरवाही, बड़ा हादसा”
थाना प्रभारी संजय लोधी ने साफ कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। उन्होंने कहा कि एक छोटी गलती भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए हेलमेट पहनना सिर्फ नियम नहीं, बल्कि जीवन रक्षा कवच है। साथ ही लोगों से सीट बेल्ट लगाने, नशे में वाहन न चलाने और मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग से बचने की अपील भी की गई।
क्यों जरूरी है ऐसा अभियान?
आज सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं, जहां हर दिन लापरवाही के कारण कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। ऐसे में इस तरह के जागरूकता अभियान लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। साथ ही यह सामुदायिक पुलिसिंग का भी उदाहरण है, जहां पुलिस और जनता के बीच भरोसा और सहयोग मजबूत होता है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

