
जबलपुर। बरगी बांध हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ऐसी दर्दनाक कहानी बन गया है जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। एक मां ने अपने 4 साल के बेटे को बचाने के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष किया, लेकिन किस्मत ने दोनों को नहीं बख्शा।
मां का आखिरी संघर्ष, बेटे को सीने से चिपकाए मिली
36 वर्षीय मरीन मैसी ने हादसे के वक्त अपने बेटे त्रिशान को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। बताया जा रहा है कि उन्होंने बेटे को लाइफ जैकेट के अंदर कसकर बांध लिया, ताकि वह सुरक्षित रह सके। शुक्रवार को जब शव बरामद हुए, तब भी मां अपने बेटे को सीने से चिपकाए मिलीं—यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
बेटी सिया की आंखों देखी, रोंगटे खड़े कर देगी कहानी
इस हादसे में बची बेटी सिया ने जो बताया, उसने कई चौंकाने वाले सवाल खड़े कर दिए। उसने बताया कि परिवार दिल्ली से छुट्टियां मनाने जबलपुर आया था और सभी बेहद खुश थे। लेकिन अचानक आई तेज लहरों और अफरा-तफरी ने कुछ ही पलों में सब कुछ बदल दिया—और यही पल पूरी कहानी का सबसे खौफनाक हिस्सा है।
‘न लाइफ जैकेट दी, न कोई नियम बताया’
सिया के मुताबिक, क्रूज पर पहले से लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। उसके पिता ने खुद जैकेट निकालकर सबको पहनाई। मां मरीन ने सिया की ढीली जैकेट को टाइट किया और फिर बेटे को पहनाने ही वाली थीं कि तभी हादसा हो गया—यहीं से लापरवाही के बड़े आरोप सामने आने लगे।
टूटा शीशा बना जीवनदान, मां-बेटा फंस गए अंदर
सिया ने बताया कि अचानक क्रूज का शीशा टूट गया, जिससे वह और उसके पिता बाहर निकल पाए।
लेकिन तब तक मरीन और त्रिशान बाहर नहीं आ सके और क्रूज पलट गया। बाहर निकलने का रास्ता बंद हो चुका था—और यही पल उनके जीवन का आखिरी साबित हुआ।
मर्चुरी में बिखर गया परिवार, पिता का दर्द देख सब रो पड़े
जब मां-बेटे के शव मेडिकल कॉलेज लाए गए, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। पिता प्रदीप अपने बेटे को गोद में उठाकर फूट-फूटकर रो पड़े और पत्नी का हाथ थामे खड़े रहे। यह दृश्य इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर पहले से लाइफ जैकेट दी जातीं और नियम समझाए जाते, तो शायद यह कहानी कुछ और होती।
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