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मध्यप्रदेश में बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि, 11.95 किमी स्लीमनाबाद टनल पूरी, नर्मदा का पानी पहुंचेगा सोन बेसिन

16 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्यप्रदेश में बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि, 11.95 किमी स्लीमनाबाद टनल पूरी, नर्मदा का पानी पहुंचेगा सोन बेसिन
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी बरगी व्यपवर्तन परियोजना ने बुधवार को बड़ा मुकाम हासिल कर लिया। करीब 15 वर्षों से निर्माणाधीन 11.95 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद अंडरग्राउंड टनल का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा हो गया, जिससे परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती समाप्त हो गई।


इस उपलब्धि के बाद नर्मदा के पानी को पहली बार सोन बेसिन तक पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। अब सुरंग से जुड़े शेष तकनीकी कार्य पूरे होने के बाद जल प्रवाह शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।


सबसे कठिन चरण हुआ पूरा

टनल का अंतिम हिस्सा मंगलवार को पूरा होना था, लेकिन खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने और लाइनिंग को नुकसान पहुंचने की आशंका के कारण काम रोक दिया गया था।


इंजीनियरों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बुधवार सुबह दोबारा खुदाई शुरू की। अंतिम लगभग एक मीटर चट्टान काटने के बाद दोनों सिरों का सफल मिलान हो गया और टनल का ब्रेकथ्रू पूरा हो गया।


अब होंगे ये तकनीकी काम

ब्रेकथ्रू के बाद टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को पहले से तैयार वर्टिकल शाफ्ट के जरिए चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला जाएगा।


इसके बाद सुरंग के भीतर लाइनिंग, फिनिशिंग, विद्युत व्यवस्था और अन्य तकनीकी कार्य पूरे किए जाएंगे। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद नर्मदा का पानी सोन बेसिन की ओर प्रवाहित किया जाएगा।


छह जिलों को मिलेगा सिंचाई का लाभ

परियोजना पूरी होने पर प्रदेश के कटनी, मैहर, सतना, रीवा सहित छह जिलों की करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

  • 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को लाभ

  • कटनी जिले की 21,823 हेक्टेयर भूमि होगी लाभान्वित

  • वर्षा आधारित खेती पर निर्भरता घटेगी

  • कृषि उत्पादन बढ़ने की संभावना


लागत बढ़कर पहुंची 1442 करोड़ रुपये

परियोजना को वर्ष 2008 में मंजूरी मिली थी, जबकि सुरंग निर्माण का काम 2011 में शुरू हुआ। शुरुआत में इसकी लागत 799 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन कठिन भूगर्भीय परिस्थितियां, ऊंचा भूजल स्तर, सिंकहोल, कोरोना काल और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारण लागत बढ़कर करीब 1442 करोड़ रुपये हो गई।


करीब 30 मीटर गहराई में जर्मनी निर्मित अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की मदद से सुरंग का निर्माण किया गया, जिसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि माना जा रहा है।


मुख्यमंत्री कर सकते हैं निरीक्षण

टनल निर्माण पूरा होने की जानकारी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने राज्य शासन को भेज दी है। अधिकारियों के मुताबिक, अगले 2 से 3 दिनों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्लीमनाबाद पहुंचकर परियोजना का निरीक्षण कर सकते हैं। प्रशासन ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।


एसडीओ ने क्या कहा

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के एसडीओ दीपक मंडलोई ने बताया कि टनल की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि टीबीएम मशीन शाफ्ट तक पहुंच गई है और जल्द बाहर निकाली जाएगी। इसके बाद लाइनिंग सहित अन्य तकनीकी कार्य पूरे किए जाएंगे।

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