
भोपाल। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने मंगलवार को मंत्रालय में विभाग के कार्यों और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग का कल्याण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक अनिवार्य रूप से पहुंचना चाहिए, ताकि उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन स्तर में प्रभावी सुधार लाया जा सके।
बैठक में मंत्री नागर सिंह चौहान ने भिंड, मुरैना, शाजापुर और विदिशा में स्वीकृत कन्या छात्रावासों का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण में आ रही किसी भी कठिनाई का स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला स्तरीय अधिकारियों के समन्वय से तत्काल निराकरण किया जाए। उन्होंने आगामी बैठक में छात्रावास निर्माण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
समीक्षा के दौरान पूर्व से निर्माणाधीन और नवीन स्वीकृत छात्रावासों की वर्तमान स्थिति के साथ ही संत रविदास सामुदायिक भवनों के निर्माण कार्यों की भी जानकारी प्राप्त की गई। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह, अपर आयुक्त संजय वार्ष्णेय सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
छात्रवृत्ति शिकायतों का जल्द हो निराकरण
मंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बजट आवंटन व व्यय की भी समीक्षा की। इनमें प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना, अत्याचार निवारण अधिनियम-1989, प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति, कक्षा 1 से 8 तक की छात्रवृत्ति, दिल्ली छात्रवृत्ति, परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण और आवास सहायता योजना शामिल हैं।
छात्रवृत्ति से जुड़ी शिकायतों का तत्काल निराकरण हो
सीएम हेल्पलाइन पर छात्रवृत्ति से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जल्द निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायतों को उनके कारणों के आधार पर श्रेणीवार विभाजित कर प्रभावी कार्रवाई की जाए, जिससे विद्यार्थियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके।
स्वरोजगार योजनाओं की भी समीक्षा की
बैठक में ज्ञानोदय विद्यालयों में इनडोर स्टेडियम निर्माण, प्राचार्यों एवं शिक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति, शैक्षणिक एवं अधोसंरचना विकास, स्वरोजगार योजनाओं और आकांक्षा योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा विभाग द्वारा प्रदान किए जाने वाले विभिन्न पुरस्कारों एवं सम्मान योजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
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