
भोपाल। राजधानी भोपाल के पास झिरी में बेतवा नदी के उद्गम क्षेत्र से उम्मीद की बड़ी तस्वीर सामने आई है। भीषण गर्मी और सूखी पहाड़ियों के बीच चल रहे श्रमदान अभियान में गुरुवार को एक दिन में रिकॉर्ड 22 चेक डैम बनाए गए। जल संरक्षण की यह मुहिम अब लोगों को तेजी से जोड़ रही है। अभियान 16 मई तक जारी रहेगा और अंतिम दिनों में इसमें और ज्यादा लोगों के जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
कम लोग पहुंचे, लेकिन बना दिया रिकॉर्ड
10 मई से शुरू हुए इस श्रमदान सप्ताह के पांचवें दिन गुरुवार को श्रमदानियों की संख्या पहले के मुकाबले कम रही। इसके बावजूद काम की रफ्तार और उत्साह इतना ज्यादा था कि नया रिकॉर्ड बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ मिट्टी और पत्थरों का काम नहीं, बल्कि सूखते जलस्रोतों को बचाने की लड़ाई बन चुकी है। यही वजह है कि हर दिन अभियान का असर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
55 पुराने चेक डैम की भी मरम्मत
अभियान से जुड़े डॉ. आरके पालीवाल के मुताबिक अब तक पिछले साल बनाए गए 55 चेक डैम की मरम्मत पूरी की जा चुकी है। वहीं इस साल अब तक 30 नए चेक डैम तैयार किए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह रही कि कई वर्षों से पूरी तरह सूख चुका “पार्वती कुंड” भी अब फिर से जीवित हो गया है। इससे स्थानीय लोगों में नई उम्मीद जगी है।
रोज सुबह 8 बजे से चल रहा श्रमदान
झिरी स्थित बेतवा उद्गम क्षेत्र में रोज सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक श्रमदान किया जा रहा है। पर्यावरण प्रेमी, वैज्ञानिक, पूर्व अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मिलकर जल संरक्षण का यह अभियान चला रहे हैं। टीमें पुराने जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के साथ नए चेक डैम भी बना रही हैं ताकि बारिश का पानी ज्यादा समय तक रोका जा सके।
दूसरे राज्यों से भी पहुंच रहे लोग
आयोजकों के मुताबिक शुक्रवार को बनारस, जौनपुर और विदिशा से भी नए लोग इस अभियान में शामिल होने पहुंचेंगे। इससे अंतिम दो दिनों में श्रमदान का दायरा और बड़ा होने की उम्मीद है।
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