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भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी भाषा के गौरव प्रतीक: मंगुभाई पटेल

25 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Governor Mangubhai Patel

Governor Mangubhai Patel

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने गुरुवार को अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का राष्ट्र प्रेम ओजस्वी व्यक्तित्व और हिन्दी प्रेम, हिन्दी भाषा का गौरव प्रतीक है। राज्यपाल ने कहा कि उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी को निकट से देखने का मौका कई बार मिला है।

कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सत्य बोलने और धर्म का पालन करने वाले को जीवन में कोई दिक्कत नहीं होती है। यह जीवन मूल्य ही व्यक्ति की वास्तविक पूंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय के विद्यार्थी होने का सौभाग्य मिला है। भावी जीवन में माता-पिता, गुरुजन, समाज और राष्ट्र की सेवा का भाव कम नहीं होने दीजिएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि वे विश्वविद्यालय से प्राप्त संस्कारों और अनुभवों से वंचित वर्गों और पीड़ित मानवता की सेवा का कार्य निरन्तर करते रहेंगे। 

 

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन, स्मारिका एवं स्नातक प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम की हिन्दी पुस्तक का लोकार्पण किया। दीक्षांत अवसर पर स्नातक के 60, स्नातकोत्तर के 68 और अनुपस्थित 42 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने की घोषणा की गई। समारोह में राज्यपाल का स्मृति प्रतीक, शाल और पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।

 

अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व के गुणों से प्रेरणा लें: रविन्द्र कन्हारे

दीक्षांत कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष रविन्द्र कन्हारे ने विद्यार्थियों से कहा कि वह अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व के गुणों से प्रेरणा लें। उन्होंने वाजपेयी जी के संवाद कौशल, व्यक्तित्व की दृढ़ता, लोकतंत्र के प्रति आस्था और सुशासन के दृष्टांतों के साथ विद्यार्थियों को अनुकरण की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मातृभाषा से विचारों और निर्णयों में स्पष्टता आती है। जनमानस बनाने के लिए कार्य करना होगा।

 

अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी को केवल साहित्य की भाषा नहीं माना

हिन्दी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति अध्यक्ष प्रोफेसर मोहनलाल छीपा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी को केवल साहित्य की भाषा नहीं माना। हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान शासन और वैश्विक संवाद का माध्यम माना। हिन्दी विश्वविद्यालय का भी यही उद्देश्य है। उन्होंने विश्वविद्यालय की आवश्यकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की उपाधि समाज के प्रति दायित्व की घोषणा है। विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि वह ज्ञान को जन भाषा में और जन भाषा को ज्ञान में उतारने को संकल्प बनाएं। विश्विद्यालय के विकास में योगदान के लिए विश्वविद्यालय मित्रमंडल गठन की भी जरूरत बताई है।

 

विश्वविद्यालय भारतीय शिक्षा मूल्यों के साथ हिंदी के उत्थान के लिए समर्पित

कुलगुरु देव आनंद हिण्डोलिया ने बताया कि विश्वविद्यालय भारतीय शिक्षा मूल्यों के साथ हिंदी के उत्थान के लिए समर्पित है। आगामी समय में विश्वविद्यालय में कृषि अभियांत्रिकी और अभियांत्रिकी संकाय भी प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ ग्रहण कराई। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन कुल सचिव शैलेन्द्र कुमार जैन ने किया।

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