
भोपाल। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद आज एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ में होने वाली सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की बहुप्रतीक्षित सर्वे रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिस पर सभी पक्षों की नजर टिकी है।
इंदौर हाईकोर्ट में डबल बेंच करेगी सुनवाई
भोजशाला मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डबल बेंच के सामने होगी। केस को आज की सूची में क्रम संख्या 102 पर रखा गया है। हाल ही में हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि इस मामले की आगे की सुनवाई इंदौर खंडपीठ में ही होगी, जिसके बाद आज की सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद खुल रही रिपोर्ट
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने खुली अदालत में निर्देश दिया था कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट संबंधित पक्षों और उनके वकीलों को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही यह भी तय किया गया था कि भोजशाला के वास्तविक धार्मिक स्वरूप से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई हाईकोर्ट में जारी रहेगी। इसी आदेश के तहत अब 2024 में तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट को अदालत में खोला जाएगा।
क्या है ASI सर्वे रिपोर्ट का महत्व?
हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 22 मार्च से 27 जून 2024 तक लगातार 98 दिनों तक भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया था। जुलाई 2024 में रिपोर्ट को बंद लिफाफे में अदालत के सामने पेश किया गया था, जिसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया था। करीब 89 पृष्ठों की इस रिपोर्ट को 10 अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि इसमें परिसर की ऐतिहासिक संरचना और पुरातात्विक साक्ष्यों से जुड़े अहम तथ्य शामिल हो सकते हैं।
आखिर क्या है भोजशाला विवाद?
भोजशाला को लेकर लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती (वाग्देवी) मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला की दरगाह और मस्जिद बताता है। इसी विवाद के समाधान के लिए ‘हिंदू फॉर जस्टिस’ संगठन की याचिका पर कोर्ट ने एएसआई को वैज्ञानिक सर्वे कराने का आदेश दिया था, जिसके निष्कर्ष अब अदालत के सामने आने वाले हैं।
आगे क्या हो सकता है?
आज की सुनवाई में रिपोर्ट खुलने के बाद दोनों पक्षों को अपनी दलीलें रखने का मौका मिल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दस्तावेज के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय होने की संभावना है।
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