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घर रहने के लिए थे या दुकान चलाने के लिए? भोपाल की 1200 कॉलोनियों में कारोबार पहुंचने की पूरी कहानी

12 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
घर रहने के लिए थे या दुकान चलाने के लिए? भोपाल की 1200 कॉलोनियों में कारोबार पहुंचने की पूरी कहानी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल में करीब 1200 कॉलोनियों के आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से रहवासी क्षेत्रों की शांति प्रभावित होने का मुद्दा सामने आया है। संपत्तिकर वसूली और व्यावसायिक लाइसेंस से राजस्व जुटाने की व्यवस्था ने घरों में दुकान और कार्यालय खोलने का रास्ता आसान किया।


शहर की नियोजन व्यवस्था में एफएआर भी अहम मुद्दा है। वर्ष 2005 के मास्टर प्लान में बेस एफएआर 1.225 रखा गया था, जबकि बाद में 18 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों के किनारे एफएआर 3 करने का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।


एफएआर 1.225 पर अटका शहर

मास्टर प्लान में एफएआर का मतलब प्लॉट के क्षेत्रफल के मुकाबले अनुमत निर्माण से है। मौजूदा व्यवस्था को उदाहरण से समझें तो 1000 वर्गफीट के भूखंड पर करीब 1225 वर्गफीट तक निर्माण की स्थिति बनती है। साल 2007 में वर्ष 2021 को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। प्रस्ताव में शहर के विकास को ऊंचाई की दिशा देने के लिए 18 मीटर और उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों के किनारे एफएआर 3 करने की बात रखी गई थी।


एफएआर तीन होने पर जमीन के क्षेत्रफल से तीन गुना तक निर्माण संभव होता और हाईराइज इमारतों के जरिए बढ़ती आबादी के साथ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी जगह बनाई जा सकती थी। लेकिन मौजूदा स्थिति में एफएआर 1.225 ही है, जिससे ऊंची इमारतों का निर्माण आसान नहीं माना जा रहा।


2012 में फिर शुरू हुआ मास्टर प्लान का काम

वर्ष 2012 में मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2021 पर नए सिरे से काम शुरू किया गया। इसमें व्यावसायिक जरूरतों के लिए नई कमर्शियल स्पेस तैयार करने की योजना के तहत आवासीय क्षेत्रों में कुछ चिन्हित स्थानों पर अतिरिक्त एफएआर देने की बात थी। योजना का उद्देश्य आवासीय इलाकों के भीतर कारोबार के लिए अलग स्थान विकसित करना था। लेकिन टीएंडसीपी के तत्कालीन अधिकारियों ने अतिरिक्त व्यावसायिक क्षेत्र तैयार करने के लिए एफएआर के इस्तेमाल के बजाय इसकी खरीद-बिक्री के प्रावधान कर दिए।


राजस्व बढ़ा, आवासीय क्षेत्रों में कारोबार भी बढ़ा

आवासीय इलाकों में दुकानों के संचालन के लिए व्यावसायिक लाइसेंस बनाए गए और उनसे व्यावसायिक दर पर संपत्तिकर वसूला गया। घरों में कारोबार करने की सुविधा चाहने वाले दुकानदार भी इसके लिए भुगतान करते रहे। इस व्यवस्था में भू-उपयोग की स्थिति की जांच कर कार्रवाई करने के बजाय राजस्व वसूली को प्राथमिकता मिलने का आरोप है। यदि व्यावसायिक लाइसेंस और व्यावसायिक दर से संपत्तिकर लेने से पहले भू-उपयोग की स्थिति देखी जाती और जरूरत के मुताबिक नोटिस दिए जाते, तो आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार को रोका जा सकता था।


शहर के विकास पर भी असर

शहर के नियोजित विकास के लिए एक तरफ ऊंची इमारतों के जरिए अतिरिक्त आबादी को समायोजित करने की योजना सामने आई, लेकिन एफएआर में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ। दूसरी तरफ आवासीय क्षेत्रों में मौजूद मकानों को ही दुकान और कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति मिलने लगी। इससे घर, दुकान और कार्यालय को पैदल दूरी पर उपलब्ध कराने की अवधारणा का अलग रूप सामने आया—नई व्यावसायिक जगह विकसित करने के बजाय मौजूदा आवासीय संपत्तियों में ही कारोबार की गुंजाइश बढ़ती गई।


1200 कॉलोनियों में पहुंचा कारोबार

उपलब्ध तथ्यों के मुताबिक भोपाल की करीब 1200 कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियां आवासीय क्षेत्रों के भीतर पहुंच चुकी हैं। इससे रहवासियों के लिए आवासीय इलाकों की शांति और सामान्य जीवन प्रभावित होने की स्थिति बनी है। पूरे मामले में संपत्तिकर से राजस्व जुटाने, व्यावसायिक लाइसेंस जारी करने, भू-उपयोग और एफएआर से जुड़े फैसलों को शहर की मौजूदा स्थिति के प्रमुख कारणों के रूप में रखा गया है।


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