
भोपाल में विकास परियोजनाओं के लिए 2200 पेड़ काटे जाने के बाद उनके बदले 96,355 पौधे लगाने का दावा किया गया है। इन पेड़ों की कटाई के एवज में 1.35 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति राशि भी जमा कराई गई।
मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक पहुंचा, जहां डॉ. सुभाष सी. पांडेय की याचिका पर सुनवाई हुई। ट्रिब्यूनल ने पौधारोपण की संख्या से आगे बढ़कर उनके संरक्षण, हरित क्षेत्रों और अतिक्रमण की निगरानी के लिए कई निर्देश जारी किए हैं।
मेट्रो परियोजनाओं में सबसे ज्यादा पेड़ कटे
NGT के सामने रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में पेड़ों की कटाई का सबसे बड़ा हिस्सा मेट्रो रेल परियोजनाओं से जुड़ा रहा।
अलग-अलग मामलों में 127, 144, 947, 46 और 245 पेड़ काटे गए। इनकी कुल संख्या 1509 रही।
इसके अलावा BHEL के लिए 164 और विभिन्न शहरी विकास कार्यों के लिए 550 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई। इस तरह कुल आंकड़ा 2200 पेड़ रहा।
कटाई के बदले क्षतिपूर्ति राशि जमा
वन विभाग के मुताबिक सार्वजनिक और विकास कार्यों के लिए आवश्यकता की पुष्टि होने के बाद ही पेड़ काटने की अनुमति दी जाती है।
पेड़ों की परिधि के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की जाती है। जमा राशि से सरकारी खुली जमीन पर पौधारोपण और उनके संरक्षण की व्यवस्था की जाती है।
छह प्रमुख स्थानों पर लगाए गए हजारों पौधे
नगर निगम की रिपोर्ट में भोपाल में कुल 96,355 पौधे लगाए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें कई बड़े पौधारोपण स्थल शामिल हैं।
- एयरपोर्ट के तीन स्थानों पर 58,500
- आदमपुर छावनी में 10,820
- कलियासोत डैम में 10,630
- BHEL बर्ड सेंक्चुरी में 6,200
- बरखेड़ा पठानी में 1,950
- अन्य पार्कों, STP, सड़क वर्ज और चौराहों पर शेष पौधे
NGT ने कहा, सिर्फ पौधों की संख्या पर्याप्त नहीं
ट्रिब्यूनल ने क्षतिपूरक पौधारोपण को केवल कागजी लक्ष्य पूरा करने तक सीमित रखने के बजाय पौधों के जीवित रहने पर निगरानी को जरूरी माना है।
इसके लिए वन विभाग, नगर निगम, उद्यानिकी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों वाली समिति बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पौधों के संरक्षण और उनके जीवित रहने की स्थिति पर 15 साल तक निगरानी करनी होगी।
पूरे भोपाल की होगी हाई-रिजोल्यूशन GIS मैपिंग
NGT ने भोपाल नगर निगम क्षेत्र की हाई-रिजोल्यूशन GIS मैपिंग और वृक्ष गणना कराने को कहा है।
इससे पेड़ों की संख्या और प्रजाति के साथ हरित पट्टियों, खुले भू-भाग और अतिक्रमण की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।
हरित पट्टियों से हटेंगे अतिक्रमण
सड़कों के सेंट्रल और साइड वर्ज, पार्कों तथा अन्य हरित क्षेत्रों से कब्जे हटाने के बाद उनकी सुरक्षा के लिए फेंसिंग, वनीकरण और जियो-टैगिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं।
हरित पट्टियों में कंक्रीटीकरण पर रोक लगाने और इन क्षेत्रों को शहरी पर्यावरणीय सुरक्षा क्षेत्र के तौर पर विकसित करने पर जोर दिया गया है। अतिक्रमण मुक्त जमीन को 12 महीने के भीतर हरित आवरण में बदलने के निर्देश भी दिए गए हैं।
देशी प्रजातियों के पेड़ों पर जोर
NGT ने पौधारोपण में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
इनमें बरगद, पीपल, नीम, जामुन, देशी आम, कदंब, अर्जुन और साज जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
वन क्षेत्रों की खाली जमीन पर भी स्थानीय प्रजातियों का रोपण किया जाएगा। वन भूमि का GIS-GPS और सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए सीमांकन तथा अतिक्रमण की त्रैमासिक निगरानी भी जरूरी होगी।
तीन महीने में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
भोपाल नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्हें तीन महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। वरिष्ठ वन अधिकारियों को भी पूरी प्रक्रिया पर नियमित निगरानी रखने को कहा गया है।
मियावाकी से ग्रीन रूफ तक विकल्प
शहरी हरियाली बढ़ाने के लिए NGT ने कई वैकल्पिक उपायों पर भी विचार करने को कहा है।
इनमें मियावाकी प्लांटेशन, मेट्रो संरचनाओं के आसपास वर्टिकल ग्रीन फैसेड, परिवहन सुविधाओं के पास हरित बफर और नई इमारतों में ग्रीन रूफ जैसे विकल्प शामिल हैं।
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