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भोपाल में रहवासी इलाकों के 62,500 प्रतिष्ठानों का क्या होगा? आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

15 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में रहवासी इलाकों के 62,500 प्रतिष्ठानों का क्या होगा? आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मामले में नगर निगम की कार्रवाई और उसकी रिपोर्ट के साथ रहवासियों की आपत्तियां भी सामने रखी जाएंगी।


नगर निगम 62,500 प्रतिष्ठानों की सूची के आधार पर कार्रवाई कर चुका है। इनमें 8,084 को नोटिस दिए गए और 190 प्रतिष्ठानों को तीन दिन तक बंद कराया गया था। व्यापारियों के विरोध के बाद अभियान रोक दिया गया।


5 अगस्त के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

मामले की पृष्ठभूमि आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण से जुड़ी है। 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।


कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश यानी स्टे ऑर्डर भी समाप्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में चल रही जांच में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करने की बात कही थी।


8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस, 190 पर हुई कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस देना शुरू किया। यह प्रक्रिया करीब 15 दिन चली।


नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक 62,500 सूचीबद्ध प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद 190 प्रतिष्ठानों को तीन दिन तक बंद रखा गया।


व्यापारियों के विरोध के बाद रुका अभियान

नोटिस और सीलिंग के खिलाफ व्यापारी विरोध में सड़क पर उतर आए। इसके बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले 15 दिनों से अभियान आगे नहीं बढ़ा है।


नगर निगम अपनी अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर चुका है। 15 सितंबर की सुनवाई में इसी रिपोर्ट पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।


रहवासियों ने निगम की रिपोर्ट पर उठाए सवाल

रहवासियों की तरफ से नगर निगम की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की Action Taken Report को चुनौती देते हुए अपने दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में पेश किए हैं।


उनका आरोप है कि निगम की ओर से दिखाई गई कार्रवाई वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। उनका कहना है कि जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, उनमें से कुछ फिर से खुल चुके हैं।


रहवासी क्यों चाहते हैं कमर्शियल गतिविधियों पर रोक?

रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों की मुख्य चिंताएं हैं—

  1. आवासीय क्षेत्रों में शोर और भीड़ बढ़ना।

  2. सार्वजनिक शांति और सामान्य रहन-सहन प्रभावित होना।

  3. असामाजिक गतिविधियों में बढ़ोतरी की आशंका।

  4. इलाके की सुरक्षा को लेकर चिंता।

  5. स्कूली बच्चों की आवाजाही पर बढ़ते ट्रैफिक का असर।

  6. सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ना।


अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

नगर निगम अपनी कार्रवाई का रिकॉर्ड कोर्ट के सामने रख चुका है। दूसरी तरफ रहवासियों ने निगम की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दस्तावेज दाखिल किए हैं।


15 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इन दोनों पक्षों के रिकॉर्ड पर विचार करेगा और भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े मामले में आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

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