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भोपाल में बढ़े बच्चों की आंखों से पानी आने के मामले, AIIMS ने इलाज में देरी पर संक्रमण और दृष्टि नुकसान की दी चेतावनी

06 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में बढ़े बच्चों की आंखों से पानी आने के मामले, AIIMS ने इलाज में देरी पर संक्रमण और दृष्टि नुकसान की दी चेतावनी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। AIIMS भोपाल के डॉक्टरों का कहना है कि कई मामलों में इसकी वजह जन्मजात बंद आंसू की नली होती है। समय रहते उपचार मिलने पर अधिकांश बच्चों की समस्या ठीक हो सकती है, लेकिन लापरवाही संक्रमण और आंखों की रोशनी पर असर डाल सकती है।


कब सामान्य नहीं होता आंखों से पानी आना?

राजधानी भोपाल में शिशुओं और छोटे बच्चों में आंखों से लगातार पानी आने की शिकायतें बढ़ रही हैं। कई अभिभावक इसे एलर्जी या सामान्य संक्रमण मानकर इलाज में देरी कर देते हैं, जबकि कुछ बच्चों में यह जन्म से आंसू की नली बंद होने के कारण होता है। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार आंखों की सुरक्षा के लिए बनने वाले आंसू सामान्य रूप से एक पतली नली के जरिए नाक तक पहुंचते हैं। यदि यह नली जन्म के समय पूरी तरह नहीं खुलती, तो आंसू बाहर नहीं निकल पाते और आंखों से बहने लगते हैं। इस स्थिति को जन्मजात ब्लॉक्ड टियर डक्ट कहा जाता है। इसके साथ आंखों में पीला या चिपचिपा स्राव भी दिखाई दे सकता है।


किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

विशेषज्ञों ने बताया कि यदि बच्चे में ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए—

  1. आंखों से कई सप्ताह तक लगातार पानी आना।

  2. आंखों का लाल होना।

  3. सूजन या दर्द महसूस होना।

  4. बार-बार संक्रमण होना।

  5. पीला या चिपचिपा स्राव निकलना।

  6. तेज रोशनी में आंखें बंद करना या परेशानी होना।


डॉक्टरों के अनुसार कुछ दुर्लभ मामलों में ये संकेत जन्मजात ग्लूकोमा जैसी गंभीर आंखों की बीमारी से भी जुड़े हो सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर दृष्टि प्रभावित होने का खतरा रहता है।


AIIMS भोपाल ने बताया उपचार का तरीका

AIIMS भोपाल के रेटीना सर्जन डॉ. समनेन्द्र खारकुर के मुताबिक अधिकांश बच्चों में पहले एक वर्ष के भीतर आंसू की नली स्वयं खुल जाती है। हल्की मालिश करने से भी कई बच्चों को लाभ मिलता है। यदि 9 से 12 महीने तक समस्या बनी रहती है, तो प्रोबिंग प्रक्रिया के जरिए बंद नली खोली जाती है। उपचार में देरी होने पर आंखों में मवाद जमा हो सकता है, जिससे संक्रमण बढ़ने और आंखों की रोशनी प्रभावित होने का जोखिम रहता है।


अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चे की आंखों से लगातार पानी आए, पीला स्राव दिखाई दे, आंख लाल या सूजी हो अथवा तेज रोशनी से परेशानी हो, तो बिना देर किए नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। समय पर उपचार से संक्रमण और दृष्टि संबंधी गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।

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