
भोपाल में पकड़े गए कथित आतंकी मॉड्यूल की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में जांच एजेंसियों को कई अहम जानकारियां मिली हैं। हालांकि इन दावों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही हैं।
पूछताछ में 'मिशन 2047' का कथित जिक्र
एटीएस सूत्रों के अनुसार, रिमांड पर चल रहे इजहार उल हक ने पूछताछ में बताया कि वह और उससे जुड़े अन्य लोग कथित तौर पर 'मिशन 2047' के तहत काम कर रहे थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित एजेंडे का संबंध पीएफआई की विचारधारा को वर्ष 2047 तक लागू करने की योजना से बताया गया है।
धारा, विचारधारा और कथित लक्ष्य पर जांच
एटीएस के अनुसार, पूछताछ में यह भी दावा किया गया कि कथित नेटवर्क के सदस्यों को समय आने पर एक साथ सक्रिय होने और देश में भय का माहौल पैदा करने जैसे कार्यों के लिए तैयार रहने की शपथ दिलाई गई थी। एजेंसी इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने में जुटी है।
नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार इजहार उल हक से पूछताछ के आधार पर एटीएस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा इसकी गतिविधियां किन-किन राज्यों तक फैली थीं। इसी सिलसिले में उसे 22 जून तक पुलिस रिमांड पर रखा गया है।
पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क के दावे
पूछताछ में सामने आए इनपुट के अनुसार, फराज ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था और उनके निर्देश पर अन्य युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। जांच एजेंसी इन दावों की भी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
देवबंद कनेक्शन और वीडियो कॉल के जरिए शपथ का दावा
पूछताछ में फराज ने बताया कि वह पिछले 5-6 वर्षों से देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था। जांच के अनुसार, नईम ने ही कथित तौर पर उसका परिचय पाकिस्तानी हैंडलर्स से कराया। एटीएस का दावा है कि वीडियो कॉल के माध्यम से उसे कथित तौर पर जिहाद के नाम पर शपथ भी दिलाई गई थी।
टेलीग्राम और वॉट्सएप ग्रुप की जांच
एटीएस के मुताबिक, चारों संदिग्धों ने पूछताछ में भारत के कई राज्यों और पाकिस्तान में मौजूद लोगों से टेलीग्राम तथा वॉट्सएप ग्रुप के जरिए संपर्क में रहने की बात कही है। जांच में यह भी सामने आया कि फराज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से 'खालिद सैफुल्ला' नाम का इस्तेमाल करता था।
जांच अभी जारी
एटीएस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी डिजिटल, तकनीकी तथा अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। एजेंसी का फोकस पूरे कथित नेटवर्क की संरचना, उसके सदस्यों और गतिविधियों की पुष्टि करना है।
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