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भोपाल में बड़ा तालाब बचाने बुलडोजर तैयार, 347 निर्माण निशाने पर

27 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में बड़ा तालाब बचाने बुलडोजर तैयार, 347 निर्माण निशाने पर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल में बड़ा तालाब बचाने की कार्रवाई अब तेज होने जा रही है। एक हफ्ते के ब्रेक के बाद प्रशासन फिर मैदान में उतर रहा है और इस बार निशाने पर हैं 347 अवैध निर्माण। इसका असर सीधे शहर के पर्यावरण और हजारों लोगों पर पड़ेगा


कैचमेंट एरिया में सख्त कार्रवाई, 347 को अंतिम नोटिस

नगर निगम और जिला प्रशासन की टास्क फोर्स ने बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में बने 347 निर्माणों को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। ये वे ढांचे हैं जो पानी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित कर रहे थे। अब प्रशासन साफ कर चुका है—नोटिस के बाद अगला कदम सीधा बुलडोजर होगा। यानी समय बेहद कम बचा है और कार्रवाई तय मानी जा रही है…


फुल टैंक लेवल के अंदर 55 निर्माण पहले ही ढहाए

प्रशासन पहले ही फुल टैंक लेवल (FTL) के भीतर बने कई निर्माणों पर कार्रवाई कर चुका है। अब तक 55 अवैध ढांचे पूरी तरह तोड़े जा चुके हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के नेतृत्व में नगर निगम, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम अगले सप्ताह फिर अभियान शुरू करेगी। यह संकेत है कि इस बार कार्रवाई और भी व्यापक होगी…


टीटी नगर से शुरू होगा अगला चरण

अभियान की शुरुआत भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र से की जाएगी, जहां सीमांकन का काम पूरा हो चुका है। यहां 127 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं, जिनमें 59 निजी और 78 सरकारी निर्माण शामिल हैं। खास बात यह है कि इस सूची में कुछ हाई-प्रोफाइल नाम भी सामने आए हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है…


झुग्गियां, रेस्टोरेंट और होटल भी सूची में

कार्रवाई सिर्फ छोटे निर्माणों तक सीमित नहीं है। वन विहार के आसपास कई व्यावसायिक ढांचे भी जांच के दायरे में आए हैं, जिनमें रेस्टोरेंट, होटल और अन्य दुकानें शामिल हैं। इसके अलावा प्रशासन ने साफ किया है कि 100 से ज्यादा झुग्गियां भी हटाई जाएंगी। यानी यह अभियान व्यापक स्तर पर शहर की तस्वीर बदल सकता है…


क्यों अहम है बड़ा तालाब और कैचमेंट एरिया?

भोपाल का बड़ा तालाब सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि शहर की लाइफलाइन है। यह लाखों लोगों को पानी उपलब्ध कराता है और पर्यावरण संतुलन बनाए रखता है। कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण होने से पानी का प्रवाह रुकता है, जल स्तर प्रभावित होता है और भविष्य में जल संकट गहरा सकता है। इसलिए यह कार्रवाई सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जरूरत भी है।

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