
भोपाल। राजधानी भोपाल के बावड़िया कलां स्थित शुभालय बिहार में 22 मकानों को नगर निगम ने टीएंडसीपी से स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किए हैं। इनमें 17 मकान पूरे हैं, जबकि 5 निर्माण अभी अधूरे बताए गए हैं।
निगम ने 17 मकान मालिकों को 15 दिन के भीतर निर्माण स्वयं हटाने को कहा है। अधूरे 5 मकानों में तत्काल निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए हैं। मामला हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका के बाद कार्रवाई तक पहुंचा।
निगम की अपनी बिल्डिंग परमिशन भी सवालों में
इस मामले का एक अहम पहलू यह है कि जिन मकानों को अब नगर निगम अवैध निर्माण मानकर नोटिस दे रहा है, उनकी बिल्डिंग परमिशन निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा से ही जारी हुई थी।
उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को नगर निगम को पत्र भेजकर कार्रवाई के लिए कहा था। इसके बाद निगम ने चरणबद्ध तरीके से पहले 17 और फिर बाकी 5 मकानों समेत कुल 22 निर्माणों को नोटिस जारी किए।
48 प्लॉट बेचने का आरोप
याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित का आरोप है कि गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित के 44 संस्थापक सदस्यों की करीब 5 एकड़ जमीन पर भू-माफिया ने 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेच दिए।
दीक्षित के मुताबिक, इन प्लॉटों को खरीदने वाले लोग संस्था के सदस्य नहीं थे और उन्होंने संस्था को कोई राशि भी नहीं दी। उनका दावा है कि संस्थापक सदस्यों को उनकी जमीन का हिस्सा भी नहीं मिल पाया।
रजिस्ट्रियों को शून्य कराने कोर्ट पहुंचा सहकारिता विभाग
सहकारिता विभाग ने इन रजिस्ट्रियों को शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट में केस दायर किया है। मामला संस्था की जमीन और प्लॉटों के हस्तांतरण से जुड़े विवाद से संबंधित है।
फरवरी 2026 में सहकारिता विभाग की जांच में वर्ष 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों की जगह बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां किए जाने की बात सामने आई।
32 रजिस्ट्रियां जांच में अवैध मिलीं
जांच के दौरान इनमें से 32 रजिस्ट्रियां अवैध पाई गईं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 38 रजिस्ट्रियों से जुड़ी करीब 18.74 करोड़ रुपये की राशि संस्था के खाते में जमा नहीं हुई।
ऑपरेटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेज और हैंडराइटिंग में हेरफेर किए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया से वास्तविक सदस्यों के अधिकार प्रभावित हुए।
अनिता विष्ट और मनोज साहू के कार्यकाल में हुईं रजिस्ट्रियां
जांच में सामने आई रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल की हैं।
पूरे विवाद के बीच नगर निगम की कार्रवाई अब 22 निर्माणों तक पहुंच गई है। मामला पहले से हाईकोर्ट की अवमानना याचिका और सहकारिता विभाग की जांच से जुड़ा हुआ है।
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