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भोपाल गोमांस तस्करी केस: 70 दिन बाद मुख्य आरोपी असलम कुरैशी को जमानत, जांच पर उठे बड़े सवाल
19 मार्च, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
भोपाल गोमांस तस्करी केस: 70 दिन बाद मुख्य आरोपी असलम कुरैशी को जमानत, जांच पर उठे बड़े सवाल
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल के चर्चित गोमांस तस्करी मामले में करीब ढाई महीने बाद बड़ा मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी असलम कुरैशी को अदालत से जमानत मिल गई है, जिससे पूरे मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।


कोर्ट ने क्यों दी जमानत?

भोपाल की सेशन कोर्ट ने आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को 35 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। अदालत ने सुनवाई के दौरान जांच में कई खामियों की ओर इशारा किया। सबसे अहम बात यह रही कि पुलिस उस लैब रिपोर्ट को कोर्ट में पेश नहीं कर पाई, जिसे जांच के लिए हैदराबाद भेजा गया था। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर अपनी दलील मजबूत की और दावा किया कि ट्रक में गोमांस नहीं बल्कि भैंस का मांस था।


रिपोर्ट को लेकर उठे सवाल

मामले में पहले मथुरा लैब की रिपोर्ट में गोमांस होने की बात सामने आई थी, लेकिन दूसरी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की गई। इसी विरोधाभास ने केस को कमजोर कर दिया। बचाव पक्ष ने कोर्ट से पूछा कि जब दूसरी जांच रिपोर्ट मौजूद है, तो उसे प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया। इस सवाल का संतोषजनक जवाब न मिलने पर अदालत ने आरोपी को राहत दे दी।


क्या है पूरा मामला?

दिसंबर 2025 में भोपाल में हिंदू संगठनों ने एक ट्रक को रोका था, जिसमें करीब 26 टन मांस भरा हुआ था। आरोप लगाया गया कि यह गोमांस है। इसके बाद पुलिस ने ट्रक जब्त कर सैंपल जांच के लिए भेजे और पूरे मामले ने बड़ा रूप ले लिया।


स्लॉटर हाउस पर भी कार्रवाई

जांच के दौरान आरोप लगे कि भोपाल के स्लॉटर हाउस में अवैध रूप से गोवंश का वध किया जा रहा था और मांस को बाहर भेजा जा रहा था। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए स्लॉटर हाउस को बंद करवा दिया।


SIT जांच और गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई, जिसने करीब 500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की। आरोपी असलम कुरैशी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।


जमानत के बाद बढ़ा विरोध

असलम कुरैशी को जमानत मिलने के बाद हिंदू संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है। संस्कृति बचाओ मंच और हिंदू उत्सव समिति से जुड़े नेताओं ने फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने गंभीर मामले में आरोपी को आसानी से राहत मिलना चिंताजनक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क को उजागर नहीं किया और कई लोगों को बचाया गया।

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