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भोपाल में बाइक टैक्सी पर सख्ती, प्राइवेट नंबर वाली बाइक-कार से सवारी ढोने पर होगी कार्रवाई

22 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में बाइक टैक्सी पर सख्ती, प्राइवेट नंबर वाली बाइक-कार से सवारी ढोने पर होगी कार्रवाई
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। शहर में ऐप के जरिए चलने वाली बाइक टैक्सी और कैब सेवाओं को लेकर परिवहन विभाग ने अब रुख सख्त कर लिया है। टैक्सी यूनियनों की मांग और हालिया हड़ताल के बाद विभाग ने साफ कर दिया है कि यात्रियों को किराए पर ले जाने के लिए कमर्शियल रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। प्राइवेट नंबर की बाइक या कार से सवारी ढोते पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।


इस फैसले का सीधा असर ओला, रैपिडो और उबर जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जुड़ी उन गाड़ियों पर पड़ सकता है, जो निजी नंबर पर पंजीकृत हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भोपाल में बाइक टैक्सी सेवा बंद होने जा रही है। नियमों के तहत पंजीकृत कमर्शियल वाहन यात्रियों को लेकर चलते रहेंगे।


हड़ताल के बाद सरकार ने लिया सख्त रुख

भोपाल में टैक्सी चालक संगठनों ने 18 से 20 अगस्त तक आंदोलन किया था। इस दौरान किराया तय करने के साथ-साथ ऐप आधारित सेवाओं में निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।


टैक्सी यूनियनों का आरोप था कि कमर्शियल परमिट लेकर टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों पर परमिट, फिटनेस, बीमा और टैक्स जैसी कई जिम्मेदारियां होती हैं, जबकि निजी नंबर के वाहन इन्हीं यात्रियों को अपेक्षाकृत कम लागत में ढो रहे हैं। यूनियनों ने इसे नियमों का असमान पालन बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।


हड़ताल के दौरान शहर में ऐप आधारित कैब सेवाएं प्रभावित हुईं और यात्रियों को स्टेशन, एयरपोर्ट समेत कई जगहों पर परेशानी का सामना करना पड़ा।


आरटीओ ने कहा- प्राइवेट नंबर की गाड़ी से सवारी ढोई तो कार्रवाई

भोपाल के आरटीओ जितेंद्र शर्मा के मुताबिक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को ले जाने वाले वाहनों का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। निजी पंजीकरण वाली कार या मोटरसाइकिल को टैक्सी के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर परिवहन विभाग कार्रवाई करेगा।


विभाग का तर्क है कि कमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस, बीमा और अन्य नियामकीय शर्तें लागू होती हैं। निजी वाहनों को इन्हीं मानकों के तहत यात्री परिवहन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।


परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की टीमें ऐसे वाहनों की जांच प्रमुख चौराहों, पिकअप प्वाइंट और व्यस्त यातायात मार्गों पर कर सकती हैं। नियम तोड़ने वाले वाहनों पर जुर्माने के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।


कितनी बाइक और कारों पर पड़ेगा असर?

यहां सबसे अहम सवाल यह है कि भोपाल में ऐप आधारित सेवाओं से कितने निजी वाहन जुड़े हैं। यूनियन स्तर पर बड़ी संख्या में निजी बाइक और कारों के इस्तेमाल का दावा किया गया है, लेकिन निजी नंबर वाले वाहनों की कुल संख्या का कोई स्पष्ट आधिकारिक आंकड़ा परिवहन विभाग ने सार्वजनिक नहीं किया है।


हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, सख्ती लागू होने के बाद भोपाल की सड़कों से करीब 700 चार पहिया और 1,000 दोपहिया निजी वाहन हट सकते हैं, क्योंकि ये कमर्शियल टैक्सी के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे।


इसलिए 10 हजार से अधिक बाइक के बाइक टैक्सी के रूप में चलने का दावा फिलहाल आधिकारिक आंकड़े के तौर पर नहीं माना जा सकता। खबर में इसे यूनियन या संबंधित पक्ष का दावा बताकर ही देखना उचित होगा।


बाइक टैक्सी की राइड कम हो सकती हैं, सेवा बंद नहीं

नियमों का असर सबसे ज्यादा उन ऐप यूजर्स को दिखाई दे सकता है, जो कम किराए में बाइक टैक्सी बुक करते हैं। अगर निजी नंबर वाली बाइक पर कार्रवाई बढ़ती है तो उपलब्ध बाइक की संख्या घट सकती है। इसका असर खास तौर पर पीक टाइम में राइड मिलने के समय और उपलब्धता पर पड़ सकता है।


लेकिन कमर्शियल नंबर वाली बाइक के संचालन पर इस फैसले से रोक नहीं लगती। यानी नियमों का पालन करने वाले ऑपरेटर और चालक बाइक टैक्सी सेवा जारी रख सकते हैं।


केंद्र सरकार की Motor Vehicle Aggregator Guidelines 2025 में भी राज्य सरकारों को कुछ परिस्थितियों में गैर-परिवहन मोटरसाइकिलों को एग्रीगेटर के माध्यम से यात्री परिवहन के लिए अनुमति देने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में बाइक टैक्सी के मामले में अंतिम व्यवस्था राज्य सरकार के नियमों और अनुमति पर भी निर्भर करती है।


कमर्शियल वाहन चालकों ने उठाया खर्च का मुद्दा

टैक्सी यूनियन कल्याण समिति संपूर्ण भारत के वरिष्ठ राष्ट्रीय सचिव नफीस उद्दीन का कहना है कि कमर्शियल वाहन संचालित करने वाले चालक कई तरह की अनिवार्य औपचारिकताएं पूरी करते हैं। इनमें परमिट, फिटनेस, बीमा और टैक्स जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।


यूनियन का तर्क है कि जब निजी नंबर के वाहन उन्हीं यात्रियों को किराए पर ले जाते हैं तो कमर्शियल वाहन चालकों के लिए प्रतिस्पर्धा असमान हो जाती है। इसी वजह से यूनियन लंबे समय से एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर नियमों का समान रूप से पालन कराने की मांग कर रही है।


अब निगरानी और जांच पर रहेगी नजर

फिलहाल पूरे मामले में असली बदलाव परिवहन विभाग की मैदानी कार्रवाई से दिखाई देगा। अगर निजी नंबर वाले वाहनों की नियमित जांच शुरू होती है तो ओला, रैपिडो और अन्य ऐप आधारित सेवाओं में उपलब्ध वाहनों की संख्या घट सकती है।


वहीं, कमर्शियल रजिस्ट्रेशन, जरूरी दस्तावेज और निर्धारित नियमों के साथ चलने वाली बाइक टैक्सी और कैब सेवाओं के संचालन पर रोक नहीं है। यानी भोपाल में मामला बाइक टैक्सी बंद होने का नहीं, बल्कि प्राइवेट वाहन से कमर्शियल सवारी ढोने पर शिकंजा कसने का है।

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