
भोपाल। मध्यप्रदेश में मकान बनाने के लिए भवन निर्माण की अनुमति लेने की प्रक्रिया में डिजिटल निगरानी को महत्वपूर्ण बनाया गया है। अब प्लॉट के कोनों के GPS कोऑर्डिनेट्स दर्ज करने और उसकी जियो-टैगिंग की व्यवस्था लागू की गई है, ताकि जमीन की सही स्थिति और निर्माण की निगरानी की जा सके।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (ABPAS-3.0) को गरुड़ पोर्टल से जोड़ा है। नई व्यवस्था में निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले 2000 वर्गफीट तक के प्लॉट पर डीम्ड अनुमति का प्रावधान भी रखा गया है।
प्लॉट की GPS लोकेशन से होगी जमीन की पहचान
भवन निर्माण की अनुमति के लिए अब प्लॉट की वास्तविक स्थिति और उसकी सीमाओं से जुड़ी जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज की जाएगी। इसके लिए प्लॉट के प्रत्येक कोने के अक्षांश और देशांतर यानी GPS कोऑर्डिनेट्स देना अनिवार्य होगा।
जियो-टैगिंग से संबंधित जमीन की लोकेशन की पहचान करने में मदद मिलेगी। ABPAS-3.0 और गरुड़ पोर्टल का एकीकरण अनुमति प्रक्रिया में जरूरी जानकारियों के सत्यापन और अवैध निर्माणों की निगरानी के लिए किया गया है।
एयरपोर्ट और संरक्षित क्षेत्रों की वजह से नहीं अटकेगी अनुमति
नई व्यवस्था का एक उद्देश्य भवन निर्माण की मंजूरी के दौरान अलग-अलग विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेने की जरूरत कम करना है। इसके लिए प्लॉट की लोकेशन के आधार पर गरुड़ पोर्टल की मदद ली जाएगी।
इससे पता लगाने में सहायता मिलेगी कि संबंधित जमीन एयरपोर्ट या NMA (नेशनल मॉन्यूमेंट्स अथॉरिटी) जैसे प्रतिबंधित अथवा विशेष नियमन वाले क्षेत्र में आती है या नहीं। निर्धारित व्यवस्था के तहत जरूरी सत्यापन होने पर संबंधित विभागों की NOC लेने की आवश्यकता भी नहीं होगी।
2000 वर्गफीट तक के प्लॉट पर डीम्ड परमिशन का प्रावधान
छोटे भूखंडों पर मकान बनाने वालों के लिए नई व्यवस्था में डीम्ड अनुमति का विकल्प शामिल किया गया है। इसके तहत 2000 वर्गफीट तक के प्लॉट पर निर्धारित शर्तें पूरी होने पर यह अनुमति मिल सकेगी।
इस सुविधा का लाभ पात्रता, लागू नियमों और तय तकनीकी मानकों के अनुरूप ही मिलेगा। इससे छोटे प्लॉट पर घर बनाने वाले लोगों को भवन निर्माण की अनुमति लेने की प्रक्रिया में राहत मिलने की उम्मीद है।
स्वीकृत नक्शे से ज्यादा निर्माण करने पर होगी निगरानी
गरुड़ पोर्टल के ABPAS-3.0 से जुड़ने के बाद स्वीकृत भवन नक्शे और वास्तविक निर्माण के बीच अंतर पहचानने में मदद मिलेगी। डिजिटल निगरानी से यह पता लगाने की संभावना बढ़ेगी कि निर्माण स्वीकृत योजना के मुताबिक हो रहा है या नहीं।
उदाहरण के लिए, किसी भवन के लिए सिर्फ एक मंजिल बनाने की मंजूरी मिली है, लेकिन निर्माणकर्ता उससे अधिक मंजिलें बना रहा है, तो ऐसी स्थिति की पहचान की जा सकेगी। नियमों के विपरीत निर्माण सामने आने पर संबंधित निकाय कार्रवाई कर सकेंगे।
नगरीय प्रशासन आयुक्त ने बताई नई व्यवस्था की भूमिका
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे के मुताबिक, गरुड़ पोर्टल के जरिए भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ABPAS-3.0 के साथ एकीकरण से प्लॉट की लोकेशन और स्वीकृत नक्शे के अनुसार हो रहे निर्माण की निगरानी में सहायता मिलेगी। इससे नियमों के उल्लंघन की पहचान करके संबंधित निकाय आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।
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