
भोपाल जिले में कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप और कार्बाइड लैंप के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने गुरुवार को आदेश जारी कर ग्रामीण इलाकों में इनके उपयोग के साथ खरीद-बिक्री, भंडारण, परिवहन और प्रदर्शन पर भी प्रतिबंध लगाया है।
इस फैसले के बाद भोपाल के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कार्बाइड गन के इस्तेमाल पर रोक लागू होगी। प्रशासन ने तेज धमाकों से होने वाली शारीरिक क्षति और बच्चों की सुरक्षा को प्रतिबंध की प्रमुख वजहों में शामिल किया है।
तेज धमाके से आंखों की रोशनी और सुनने की क्षमता को खतरा
कार्बाइड गन से निकलने वाला तेज धमाका गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचा सकता है। कलेक्टर के आदेश में कान के पर्दे फटने, आंखों की रोशनी जाने और चेहरे या शरीर पर गंभीर जलन होने जैसी आशंकाओं का उल्लेख किया गया है।
प्रशासन के मुताबिक, इन उपकरणों का इस्तेमाल मानव जीवन, शारीरिक सुरक्षा और लोकशांति के लिए खतरा पैदा कर सकता है। बच्चों के लिए भी इनका उपयोग जोखिम भरा माना गया है।
भोपाल शहर में पहले ही जारी हो चुका है आदेश
भोपाल में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था के तहत शहर के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने तीन दिन पहले यह कदम उठाया था।
अब कलेक्टर के आदेश के बाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिबंध लागू हो गया है। इससे कार्बाइड गन के इस्तेमाल पर शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों में रोक सुनिश्चित की गई है।
कृषि और उद्योग में सीमित रहेगा कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जारी आदेश में कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग को नियंत्रित किया गया है। इसके तहत इस पदार्थ की बिक्री केवल वैध कृषि और औद्योगिक गतिविधियों के लिए ही की जा सकेगी।
अन्य उद्देश्यों के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। इसके विक्रेताओं को खरीद और बिक्री से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा।
आदेश तोड़ने पर किस धारा में होगी कार्रवाई?
प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने उपकरणों के इस्तेमाल के साथ उनके भंडारण, परिवहन, प्रदर्शन और कारोबार पर भी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं।
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