शनिवार, 18 जुलाई 2026
Logo
Madhaya Pradesh

भोपाल में जुटे 55 जिलों के CWC अध्यक्ष, बाल संरक्षण व्यवस्था मजबूत करने पर बना साझा रोडमैप

18 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में जुटे 55 जिलों के CWC अध्यक्ष, बाल संरक्षण व्यवस्था मजबूत करने पर बना साझा रोडमैप
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल में 17 जुलाई 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों की बाल कल्याण समितियों (CWC) के अध्यक्ष शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता स्थापित करना रहा।


मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST), भोपाल में इस कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें पॉक्सो अधिनियम, 2012 और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन में CWC की भूमिका पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।


कार्यशाला में रहे कई प्रमुख अतिथि

कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, मध्यप्रदेश के महासचिव रामेन्द्र सिंह शामिल हुए। उनके साथ MPCST के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, जिला न्यायालय भोपाल की सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया, आयोग की सदस्य श्रीमती सोनम निनामा और श्रीमती अर्चना गुप्ता भी मौजूद रहीं।


इन उद्देश्यों को लेकर हुआ आयोजन

कार्यशाला के माध्यम से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर फोकस किया गया, जिनमें शामिल हैं—

  • प्रदेश की सभी बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाना।

  • सदस्यों की विधिक और प्रक्रियागत दक्षता बढ़ाना।

  • जिलों के अनुभव और बेहतर कार्यप्रणालियों का साझा आदान-प्रदान।

  • "बालहित सर्वोपरि (Best Interest of Child)" सिद्धांत के अनुरूप बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी और मजबूत बनाना।


कानून और व्यवहारिक प्रक्रियाओं पर मिला प्रशिक्षण

प्रतिभागियों को पॉक्सो अधिनियम, 2012 तथा किशोर न्याय अधिनियम, 2015 से जुड़े विभिन्न कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।


प्रशिक्षण के दौरान जिन विषयों पर विशेष चर्चा हुई, उनमें—

  • वैधानिक प्रावधान और प्रक्रियात्मक कार्रवाई

  • बालहित सर्वोपरि का सिद्धांत

  • पुनर्वास और पुनर्स्थापन

  • विभागीय समन्वय

  • बाल कल्याण समिति की भूमिका

  • केस मैनेजमेंट

  • अभिलेख संधारण

  • आयोग की रिपोर्टिंग प्रणाली

  • संवेदनशील मामलों का प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण


संवेदनशील और निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर दिया गया जोर

रामेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रत्येक मामले में बालक या बालिका के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए समितियों को समन्वित, संवेदनशील और विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्य करना चाहिए। उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण के साथ जिम्मेदार और निष्पक्ष निर्णय लेने की आवश्यकता बताई।


तकनीक से मजबूत होगा बाल संरक्षण तंत्र

डॉ. अनिल कोठारी ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से बाल संरक्षण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, मजबूत और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।


पुनर्वास और अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष मार्गदर्शन

दूसरे सत्र में श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया ने पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चों का पुनर्वास और पुनर्स्थापन सुरक्षित, संवेदनशील और बाल-अनुकूल वातावरण में होना चाहिए तथा विधिक प्रक्रिया का पूर्ण पालन करते हुए उनके अधिकारों और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।


आयोग अध्यक्ष ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश

मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने निर्देश दिए कि बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक प्रकरण में समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सतत संवाद, प्रभावी समन्वय और बालहित सर्वोपरि सिद्धांत को प्रत्येक निर्णय का आधार बनाने पर बल दिया।


उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत पीड़ित बच्चों के लिए सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से करने की आवश्यकता भी बताई, ताकि ऐसे व्यक्तियों का चयन हो सके जो बच्चों के सर्वोत्तम हितों की प्रभावी रक्षा कर सकें।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें