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भोपाल में 200 से ज्यादा क्षेत्रों की गाइडलाइन मर्ज करने की तैयारी, रजिस्ट्री खर्च बढ़ने की आशंका

09 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में 200 से ज्यादा क्षेत्रों की गाइडलाइन मर्ज करने की तैयारी, रजिस्ट्री खर्च बढ़ने की आशंका
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल में मकान या प्लॉट खरीदने वालों का रजिस्ट्री खर्च बढ़ने की आशंका है। कलेक्टर गाइडलाइन के तहत 200 से अधिक क्षेत्रों को मर्ज करने की तैयारी है, जिससे मुख्य सड़कों के आसपास की दरें अंदरूनी कॉलोनियों पर भी लागू हो सकती हैं।


इस बदलाव का असर आम और मध्यमवर्गीय खरीदारों पर पड़ सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ इलाकों की गाइडलाइन दरें 40% तक बढ़ने का अनुमान है, जबकि पहले भी क्षेत्रीय विलय के कारण कई जगह बड़ी दरवृद्धि होने की बात सामने आई थी।


मुख्य सड़क की दर पर तय हो सकती है अंदरूनी कॉलोनियों की रजिस्ट्री

क्षेत्रों को एक श्रेणी में शामिल करने की प्रक्रिया में मुख्य मार्ग और उससे जुड़े अंदरूनी इलाकों की गाइडलाइन दरों के बीच का अंतर खत्म हो सकता है। इससे उन कॉलोनियों में संपत्ति की सरकारी दर बढ़ जाएगी, जहां वास्तविक बाजार मूल्य मुख्य सड़क से कम है। इसका सीधा असर संपत्ति की रजिस्ट्री के समय चुकाई जाने वाली स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क पर पड़ सकता है।


भोपाल के इन इलाकों में प्रस्तावित है मर्जिंग

प्रस्तावित बदलाव में शहर के कई प्रमुख मार्गों से जुड़े क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

- अयोध्या बायपास: मुख्य मार्ग और उससे जुड़े अंदरूनी इलाकों के 40 क्षेत्रों को मिलाने की तैयारी।

- संतनगर: मुख्य मार्ग से जुड़े 32 क्षेत्रों को अंदरूनी क्षेत्रों के साथ जोड़ने का प्रस्ताव।

- रातीबड़ से नीलबड़: कलखेड़ा और बरखेड़ा नाथू तक मुख्य मार्ग से 600 मीटर अंदर के क्षेत्रों के लिए समान दर निर्धारित करने की योजना। इसके तहत 18 क्षेत्र मर्ज किए जाएंगे।

- कोलार रोड और सनखेड़ी: मास्टर प्लान रोड से अंदर स्थित 35 क्षेत्रों को मुख्य मार्ग से जोड़ने की तैयारी।


₹2,500 की दर वाली कॉलोनी में भी देने पड़ सकते हैं ₹4,000 के हिसाब से शुल्क

प्रस्तावित व्यवस्था को एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए, किसी मुख्य सड़क की कलेक्टर गाइडलाइन ₹4,000 प्रति वर्गफुट है, जबकि उससे अंदर स्थित कॉलोनी की दर ₹2,500 प्रति वर्गफुट निर्धारित है।


यदि दोनों क्षेत्रों का विलय हो जाता है, तो अंदरूनी कॉलोनी की संपत्ति की गाइडलाइन दर भी ₹4,000 प्रति वर्गफुट मानी जा सकती है। बाजार में मकान की वास्तविक कीमत कम होने के बावजूद सरकारी दर बढ़ने से खरीदार को रजिस्ट्री पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।


विधायकों ने उठाए सवाल, फिर भी जारी है प्रक्रिया

कलेक्टर गाइडलाइन निर्धारित करने वाली जिला मूल्यांकन समिति की बैठकों में स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने इस नीति पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मुख्य सड़क और अंदरूनी आवासीय क्षेत्रों की व्यावसायिक उपयोगिता तथा संपत्ति का मूल्य एक जैसा नहीं हो सकता। जनप्रतिनिधियों के विरोध के बावजूद क्षेत्रों की संख्या कम करने और दरों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया जारी रहने की जानकारी दी गई है।


तीन साल में लगातार घटे गाइडलाइन के क्षेत्र

भोपाल में कलेक्टर गाइडलाइन के तहत क्षेत्रों की संख्या में पिछले तीन वर्षों से लगातार कमी आई है। 2024 में 3,900 क्षेत्रों के आधार पर गाइडलाइन तय की गई थी, जिनमें दरों में 25% से 95% तक बढ़ोतरी हुई थी। वर्ष 2025 में क्षेत्रों की संख्या घटकर 2,885 रह गई और दरों में 18% की वृद्धि की गई। अब 2026 में क्षेत्रों की संख्या 2,680 करने की स्थिति है।


 2025 में करीब 1,000 क्षेत्रों का विलय करने का दावा

इनपुट के अनुसार, प्रशासन पिछले दो वर्षों से सीधे दरें बढ़ाने के साथ क्षेत्रों की संख्या कम करके भी रजिस्ट्री का खर्च बढ़ा रहा है। वर्ष 2025 में करीब 1,000 क्षेत्रों को मर्ज किए जाने की बात कही गई है।


उस दौरान कुछ क्षेत्रों में गाइडलाइन दरें 200% तक बढ़ने का दावा किया गया था। अब 2026 में क्षेत्रों की संख्या 2,680 तक लाने की स्थिति के बीच नए विलय का प्रस्ताव सामने आया है।


आम खरीदारों की जेब पर पड़ेगा असर

गाइडलाइन दरों का निर्धारण संपत्ति की रजिस्ट्री से जुड़े खर्चों को प्रभावित करता है। इसलिए अंदरूनी कॉलोनियों को मुख्य मार्ग की श्रेणी में शामिल करने से घर खरीदने वाले परिवारों का बजट बिगड़ सकता है।


हालांकि, प्रस्तावित बदलाव के अंतिम प्रभाव का आकलन संबंधित क्षेत्रों की संशोधित गाइडलाइन दरें और लागू शुल्क सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

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