
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुद्ध पेयजल के सरकारी दावों के बीच एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। नगर निगम की लैब रिपोर्ट में शहर के कई इलाकों के पानी में खतरनाक E-Coli बैक्टीरिया मिला है। बीते 145 दिनों में शहरभर से लिए गए 20,236 पानी के सैंपल की जांच की गई, जिनमें से करीब 9,311 नमूने झुग्गी बस्ती क्षेत्रों से थे। रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि कई इलाकों में लोगों तक पहुंच रहा पानी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
4 इलाकों की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
नगर निगम की टेस्टिंग रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल के चार बड़े इलाकों में पानी के सैंपल संक्रमित पाए गए।
वाजपेयी नगर
यहां पानी में E-Coli बैक्टीरिया मिला। साथ ही TDS का स्तर 156 mg/L दर्ज किया गया। मैग्नीशियम की मात्रा 11.42 mg/L पाई गई।
अवधपुरी
इस इलाके में TDS 323 mg/L तक पहुंच गया। रिपोर्ट में E-Coli की मौजूदगी भी सामने आई।
खानूगांव
यहां पानी में E-Coli के साथ टोटल हार्डनेस 145 mg/L दर्ज की गई। TDS स्तर 248 mg/L रहा।
अर्जुन नगर
झुग्गी बहुल इस इलाके में भी पानी संक्रमित मिला। यहां TDS 104 mg/L और pH वैल्यू 7.48 रिकॉर्ड की गई।
सीवेज मिक्सिंग की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में E-Coli बैक्टीरिया का मिलना बेहद गंभीर संकेत है। गांधी मेडिकल कॉलेज की डॉ. पूर्वा गोहिया के अनुसार, इसका सीधा मतलब है कि सीवेज का गंदा पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल रहा है। इससे पीलिया, टाइफाइड और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
5 हजार से ज्यादा पाइप लीकेज सुधारे गए
नगर निगम ने दावा किया है कि बीते कुछ महीनों में शहर में 5,573 पाइपलाइन लीकेज ठीक किए गए हैं। इसके बावजूद दूषित पानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। मई महीने में ही सीएम हेल्पलाइन और मेयर हेल्पलाइन पर दूषित पानी की 83 शिकायतें दर्ज हुईं। प्रशासन ने इनमें से 74 शिकायतों के समाधान का दावा किया है।
जल स्तर भी तेजी से गिर रहा
भोपाल में पानी सप्लाई का बड़ा हिस्सा बड़े तालाब, कोलार डैम और केरवा डैम से आता है। रिपोर्ट के मुताबिक कोलार डैम का जलस्तर फुल टैंक लेवल से करीब 9 मीटर नीचे पहुंच गया है और इसकी क्षमता अब लगभग 48% रह गई है। पिछले एक महीने में ही यहां जलस्तर करीब 1 मीटर गिरा है। वहीं बड़े तालाब का सामान्य स्तर 1666.80 फीट माना जाता है, लेकिन फिलहाल यह घटकर 1659.70 फीट तक पहुंच चुका है।
झुग्गी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खतरा
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता झुग्गी और घनी आबादी वाले इलाकों को लेकर जताई गई है। इन क्षेत्रों में पुरानी पाइपलाइन, सीवेज नेटवर्क की खराब स्थिति और लीकेज के कारण संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को पानी उबालकर पीने और फिल्टर इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
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