
भोपाल। फोन की दूसरी तरफ से आवाज आई—‘बिजली बिल अपडेट नहीं हुआ है, सिस्टम में भुगतान दर्ज कराने के लिए सिर्फ 12 रुपए जमा करने होंगे।’ रकम इतनी छोटी थी कि 63 वर्षीय बुजुर्ग को शक नहीं हुआ। उन्होंने बताए गए तरीके से 12 रुपए ट्रांसफर किए। इसके कुछ ही देर बाद उनके बैंक खाते से दो बार में 70 हजार रुपए निकल गए।
यह सिर्फ एक मामला नहीं है। भोपाल में हाल के दिनों में अलग-अलग तरीकों से लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने के कई मामले सामने आए हैं। कहीं बिजली बिल अपडेट करने के नाम पर भरोसा जीता गया, कहीं शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का लालच दिया गया और कहीं क्रेडिट कार्ड का ओटीपी हासिल कर खाते से रकम निकाल ली गई।
दिए गए मामलों में सामने आई रकम को जोड़ें तो पांच मामलों में कम से कम 13 लाख 79 हजार 512 रुपए की ठगी या संदिग्ध निकासी सामने आती है। हालांकि, इन सभी मामलों को एक ही तरह का साइबर अपराध मानना उचित नहीं होगा; हर मामले की प्रकृति FIR और पुलिस जांच से तय होगी।
12 रुपए जमा कराए और खाते से 70 हजार निकल गए
हबीबगंज थाना क्षेत्र की लाला लाजपतराय कॉलोनी में रहने वाले 63 वर्षीय बुजुर्ग के मोबाइल पर कुछ दिन पहले एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताया। उसने बुजुर्ग से कहा कि उनका बिजली बिल जमा नहीं हुआ है। जब उन्होंने भुगतान करने की बात कही तो जालसाज ने नया बहाना बनाया। कहा गया कि ऑनलाइन सिस्टम में भुगतान अपडेट नहीं हो रहा है और बिल को कंप्यूटर सिस्टम में अपडेट कराने के लिए उसके बताए खाते में सिर्फ 12 रुपए जमा करने होंगे। बुजुर्ग ने 12 रुपए ट्रांसफर कर दिए। यहीं से ठगी का असली खेल शुरू हुआ।
कुछ ही देर बाद उनके बैंक खाते से दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 70 हजार रुपए निकल गए। खाते से रकम कटने का मैसेज मोबाइल पर आया तो उन्हें ठगी का पता चला। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
ठगों का सबसे बड़ा हथियार—छोटी रकम और बड़ा भरोसा
इस तरह की ठगी में रकम की शुरुआत जानबूझकर छोटी रखी जाती है। 10, 12 या 20 रुपए जैसी रकम सुनकर सामने वाले को सामान्यतः शक नहीं होता। इसके बाद ठग भुगतान, केवाईसी, रिफंड, बिल अपडेट या किसी तकनीकी समस्या के नाम पर आगे की प्रक्रिया कराते हैं। बिजली बिल के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पहले भी उपभोक्ताओं को सावधान कर चुकी है और अधिकृत माध्यमों से ही बिल भुगतान करने की सलाह दे चुकी है।
शेयर बाजार में ज्यादा मुनाफे का लालच, 7.35 लाख गंवाए
बागसेवनिया थाना क्षेत्र के साकेत नगर निवासी एक व्यक्ति को शेयर बाजार में निवेश से ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। जालसाजों ने निवेश के नाम पर अलग-अलग तरीकों से उससे कुल 7 लाख 35 हजार रुपए जमा करा लिए। जब निवेश की रकम वापस नहीं मिली तो पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की।
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली ठगी में आम तौर पर पीड़ित को पहले बड़े मुनाफे के स्क्रीनशॉट, फर्जी ऐप, व्हाट्सऐप ग्रुप या तथाकथित एक्सपर्ट के जरिए भरोसा दिलाया जाता है। शुरुआत में छोटा मुनाफा दिखाकर रकम बढ़वाई जाती है और बाद में निकासी के नाम पर टैक्स, चार्ज या अन्य फीस मांगकर ठगी बढ़ती जाती है।
भोपाल पुलिस पहले भी शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा कर चुकी है। एक मामले में पुलिस ने ₹9.35 लाख की ऑनलाइन ठगी की जांच करते हुए फर्जी बैंक खातों के इस्तेमाल की बात सामने लाई थी।
सस्ता मकान दिलाने का झांसा, ढाई लाख की ठगी
अवधपुरी इलाके की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले एक व्यक्ति से सस्ता मकान दिलाने के नाम पर ढाई लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने नामजद आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी जुटाकर मामले की जांच कर रही है।
यह मामला बाकी घटनाओं से थोड़ा अलग है। इसलिए इसे सीधे साइबर फ्रॉड की श्रेणी में रखने के बजाय धोखाधड़ी के मामले के तौर पर रिपोर्ट करना ज्यादा सुरक्षित है, जब तक FIR में ऑनलाइन माध्यम या साइबर अपराध की स्पष्ट पुष्टि न हो।
ओटीपी पूछा और खाते से 50,512 रुपए गायब
टीटी नगर थाना क्षेत्र में चक्की चौराहे के पास रहने वाले एक व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी के नाम पर निशाना बनाया गया। जालसाज ने ओटीपी हासिल किया और इसके बाद खाते से 50,512 रुपए निकाल लिए गए। यह मामला एक बार फिर बताता है कि बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी के नाम पर आने वाली कॉल कितनी खतरनाक हो सकती है।
बैंक कर्मचारी, कस्टमर केयर अधिकारी या कोई सरकारी अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति अगर ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड का सीवीवी या नेट बैंकिंग पासवर्ड मांगता है तो बातचीत तुरंत खत्म करना ही सुरक्षित है।
एक और खाते से 2.74 लाख रुपए निकले
अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र के भीम नगर निवासी एक व्यक्ति के बैंक खाते से 2 लाख 74 हजार रुपए निकाले जाने का मामला भी सामने आया है। पुलिस लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और तकनीकी जानकारी के आधार पर मामले की जांच कर रही है। यानी अलग-अलग मामलों में तरीका भले अलग रहा, लेकिन ठगों का लक्ष्य एक ही था—पहले भरोसा पैदा करना और फिर डिजिटल तरीके से पैसा हासिल करना।
आंकड़े बताते हैं कि समस्या छोटी नहीं है
भोपाल में साइबर ठगी की घटनाएं अचानक सामने आई हों, ऐसा नहीं है। फरवरी 2026 में ही एक रिपोर्ट के मुताबिक शहर में सिर्फ 30 घंटे के भीतर 34 साइबर फ्रॉड केस दर्ज हुए थे और पीड़ितों से कुल 1 करोड़ 53 लाख 76 हजार 531 रुपए की ठगी की गई थी।
एक अन्य रिपोर्ट में एक दिन में 28 मामलों में 1.36 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी सामने आने की जानकारी दी गई थी। इन मामलों में फर्जी शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, निवेश, नौकरी, बिजली कनेक्शन और बिल भुगतान जैसे अलग-अलग लालच इस्तेमाल किए गए थे।
राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े भी बढ़ते साइबर अपराध की तस्वीर दिखाते हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार मध्य प्रदेश में संचार उपकरणों को माध्यम या लक्ष्य बनाकर दर्ज साइबर अपराध के मामले 2023 के 685 से बढ़कर 2024 में 1,081 हो गए।
ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- बिजली बिल, बैंक, केवाईसी या क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर आए अनजान कॉल पर भरोसा न करें।
- 10-20 रुपए जैसी छोटी रकम जमा करने के लिए भी किसी अनजान व्यक्ति के बताए लिंक या खाते का इस्तेमाल न करें।
- बैंक, पुलिस या कोई सरकारी एजेंसी फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड नहीं मांगती।
- शेयर बाजार में निवेश से पहले कंपनी, ऐप और निवेश प्लेटफॉर्म की स्वतंत्र रूप से जांच करें।
- व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में दिखाए जा रहे ‘गारंटीड मुनाफे’ के दावों से सावधान रहें।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें।
ठगी हो जाए तो सबसे जरूरी है समय बर्बाद न करना
अगर खाते से पैसे निकल गए हैं तो बैंक को तुरंत सूचना देने के साथ 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की जा सकती है। भोपाल पुलिस ने भी साइबर ठगी की स्थिति में 1930 और अपने साइबर हेल्पलाइन नंबरों पर तत्काल सूचना देने की अपील की है।
साइबर अपराध में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी पर कार्रवाई की संभावना बढ़ती है।
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