
भोपाल में साइबर ठग लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। शेयर बाजार, IPO में निवेश और यहां तक कि बोर्ड परीक्षा के नंबर बढ़ाने का झांसा देकर तीन अलग-अलग मामलों में 47 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी सामने आई है। पुलिस ने मामलों में जांच शुरू कर दी है। साइबर पुलिस लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही है, लेकिन इसके बावजूद ठग नए हथकंडों से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
शेयर बाजार में निवेश का लालच देकर 28 लाख रुपये ठगे
स्नेह नगर, मिसरोद निवासी और गेल इंडिया लिमिटेड से सेवानिवृत्त प्रेमलाल राधेलाल कापसे को एक अज्ञात कॉल आया। कॉल करने वालों ने शेयर बाजार और IPO में निवेश पर भारी मुनाफे का दावा किया। इसके बाद उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़कर फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाया गया। निवेश के साथ नकली मुनाफा भी स्क्रीन पर दिखाया गया। अलग-अलग किस्तों में उनसे ₹28,14,884 ट्रांसफर करा लिए गए। पुलिस के अनुसार, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर उन्हें ₹67.83 लाख और दूसरे अकाउंट में ₹9.68 लाख का फर्जी मुनाफा दिखाया जा रहा था, ताकि उन्हें शक न हो।
बेटी के नंबर बढ़ाने का झांसा, पिता से 90 हजार की ठगी
दूसरे मामले में हबीबगंज निवासी अमित खरे अपनी बेटी के बोर्ड परीक्षा परिणाम से परेशान थे। इसी दौरान उन्हें एक विज्ञापन मिला, जिसमें कम समय में परीक्षा देकर अंक और प्रतिशत बढ़ाने का दावा किया गया था। इस झांसे में आकर उन्होंने ₹90,000 की रकम ठगों को भेज दी। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि पूरा मामला साइबर धोखाधड़ी का था।
रेस्टोरेंट संचालक से भी 18.34 लाख रुपये ठगे
टीटी नगर क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट संचालक पवन अग्रवाल को फेसबुक पर ट्रेडिंग से जुड़ा विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन देखने के बाद उनकी बातचीत कथित ट्रेडिंग विशेषज्ञों से शुरू हुई। पहले ट्रेडिंग अकाउंट खोलने के नाम पर ₹96 हजार जमा कराए गए। इसके बाद अलग-अलग बहानों से कुल ₹18.34 लाख ठग लिए गए। पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है।
साइबर पुलिस की चेतावनी के बावजूद बढ़ रहे मामले
भोपाल में साइबर ठगी के लगातार सामने आ रहे मामलों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस समय-समय पर लोगों को सतर्क रहने और अनजान कॉल, लिंक तथा निवेश के झूठे वादों से बचने की सलाह देती है, लेकिन ठग हर बार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
- 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर तुरंत कॉल करें।
- साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को तत्काल सूचना देकर संबंधित खाते या ट्रांजेक्शन को ब्लॉक कराने का प्रयास करें।
- चैट, स्क्रीनशॉट, बैंक रसीद और अन्य सभी डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें।
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