
भोपाल। राजधानी भोपाल में मानसून की दस्तक से पहले नगर निगम ने 3,435 सरकारी और निजी भवनों को जर्जर श्रेणी में चिह्नित किया है। इनमें बड़ी संख्या ऐसी इमारतें है जिन्हें बारिश के दौरान जोखिमपूर्ण माना गया है और लोगों की सुरक्षा के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नगर निगम ने अब तक 2,184 मकान मालिकों और रहवासियों को भवन खाली करने के नोटिस दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि संभावित जनहानि रोकने के लिए जर्जर इमारतों को हटाने और खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
भोपाल में कितनी इमारतें खतरे की श्रेणी में
नगर निगम के सर्वे के अनुसार राजधानी में जर्जर भवनों की स्थिति इस प्रकार है—
- कुल 3,435 भवन जर्जर सूची में शामिल।
- 2,464 सरकारी इमारतें।
- 971 निजी इमारतें।
- सरकारी भवनों में 740 अति जर्जर श्रेणी में।
- निजी भवनों में 17 अति जर्जर श्रेणी में।
- 2,184 लोगों को अब तक नोटिस जारी।
इन इलाकों को सबसे अधिक संवेदनशील माना गया
सर्वे में कुछ क्षेत्रों को अधिक जोखिम वाला बताया गया है। ऐशबाग जनता क्वार्टर में हाउसिंग बोर्ड के करीब 600 फ्लैट अत्यंत खराब स्थिति में हैं। ओल्ड सुभाष नगर और गौतम नगर में सबसे अधिक 327 जर्जर भवन दर्ज किए गए हैं। पुराना भोपाल के बैरसिया रोड, बुधवारा, इतवारा और जहांगीराबाद की तंग बस्तियों में भी बड़ी संख्या में पुराने और कमजोर मकान मौजूद हैं।
नगर निगम ने क्या कहा
भोपाल महापौर मालती राय का कहना है कि कई जर्जर फ्लैट हाउसिंग बोर्ड, बीडीए और नगर निगम की संपत्तियों से जुड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार कुछ लोगों ने दूसरे स्थान पर मकान लेने के बावजूद पुराने फ्लैट किराये पर दे रखे हैं। ऐसे मामलों में रहवासियों को भवन खाली करने के निर्देश दिए जा रहे हैं ताकि बारिश के दौरान किसी प्रकार की जनहानि न हो।
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने उठाए सवाल
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जिन स्थानों पर हर वर्ष जलभराव होता है, वहां समय रहते सुधार कार्य होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मीडिया ने जिन जगहों को चिन्हित किया है, उन पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए क्योंकि मई और जून में ऐसे काम पूरे हो जाने चाहिए थे।
रामेश्वर शर्मा ने लोगों से अपील
बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने लोगों से जर्जर मकानों को स्वयं खाली करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए खतरनाक भवनों से बाहर निकलना चाहिए और इसकी सूचना नगर निगम या जिला प्रशासन को देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन भवनों पर न्यायालय से जुड़ी प्रक्रिया लागू है, वहां प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।
मानसून से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही राजधानी में जर्जर भवनों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नोटिस जारी करने के बाद नगर निगम समय रहते भवन खाली कराने और जोखिम वाली इमारतों को हटाने की कार्रवाई कितनी तेजी से पूरी कर पाता है।
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