
भोपाल में डेंगू की वास्तविक स्थिति और सरकारी आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। अस्पतालों में 165 संदिग्ध मरीज भर्ती हैं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में अब तक केवल 52 पॉजिटिव केस दर्ज किए गए हैं। इस अंतर की मुख्य वजह डेंगू की पुष्टि के लिए जरूरी एलिजा जांच बताई जा रही है। रैपिड टेस्ट में बीमारी की आशंका मिलते ही डॉक्टर उपचार शुरू कर देते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मरीज तभी जुड़ता है, जब एलिजा रिपोर्ट पॉजिटिव आती है।
एलिजा रिपोर्ट में लग रहे दो दिन, इलाज पहले शुरू
डेंगू की पुष्टि के लिए होने वाली एलिजा यानी एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसोरबेंट एसे जांच की रिपोर्ट आने में करीब दो दिन लग रहे हैं। गंभीर हालत वाले मरीजों को डॉक्टर रिपोर्ट का इंतजार कराकर उपचार शुरू नहीं कर सकते। इसलिए डेंगू की आशंका वाले मरीजों का इलाज रिपोर्ट आने से पहले ही शुरू किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में अस्पतालों में भर्ती संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़ती दिखाई देती है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी एंट्री एलिजा पॉजिटिव आने के बाद होती है।
रैपिड टेस्ट से मिलती है शुरुआती जानकारी
डेंगू की शुरुआती पहचान के लिए रैपिड टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। मरीज में तेज बुखार और दूसरे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर बीमारी की आशंका के आधार पर उपचार शुरू कर सकते हैं। इसके बाद एलिजा जांच से डेंगू की पुष्टि की जाती है। यही अंतर अस्पतालों में मौजूद मरीजों और सरकारी आंकड़ों के बीच दिखाई दे रहा है।
भोपाल के इन क्षेत्रों में सामने आ रहे मरीज
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेंगू के मरीज भोपाल के कई हिस्सों में मिल रहे हैं। इनमें एम्स के आसपास की कॉलोनियों के साथ कुछ प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
कटारा हिल्स
बागसेवनिया
अवधपुरी
शाहजहांनाबाद
इस्लामिया गेट
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार भोपाल में करीब 1.5 लाख खाली प्लॉट हैं। बारिश के बाद इन जगहों पर पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ रहा है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डेंगू की आशंका होने पर इन लक्षणों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है—
अचानक तेज बुखार
माथे या सिर में तेज दर्द
आंखों के पीछे दर्द, खासकर आंखें हिलाने पर दर्द बढ़ना
जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द
जी मिचलाना और उल्टी
बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी
त्वचा पर लाल चकत्ते या रैश
विशेषज्ञ ने इलाज में देरी से किया सावधान
मेडिसिन विशेषज्ञ पुष्पेंद्र मिश्र के अनुसार तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द, कमजोरी, उल्टी, खून आने या स्वास्थ्य बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। उनका कहना है कि केवल एलिजा रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा में उपचार को टालना जोखिम बढ़ा सकता है। गंभीर मरीजों के मामले में चिकित्सकीय उपचार में देरी नहीं की जानी चाहिए।
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