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भोपाल-देवास रोड पर बिना रुके कटेगा टोल, फंदा प्लाजा पर शुरू हुआ बैरियर-लेस सिस्टम

03 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल-देवास रोड पर बिना रुके कटेगा टोल, फंदा प्लाजा पर शुरू हुआ बैरियर-लेस सिस्टम
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल-देवास रोड के फंदा टोल प्लाजा पर वाहनों को बिना रोके टोल वसूलने की तकनीक का ट्रायल शुरू हो गया है। इस व्यवस्था में वाहन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी टोल लेन पार कर सकेंगे।


मध्यप्रदेश में पहली बार इस तरह की व्यवस्था सक्रिय की गई है। अभी इसका परीक्षण एक लेन में हो रहा है और सफल होने पर 1 जनवरी 2027 से तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इसे लागू करने की योजना है।


टोल लेन में नहीं लगेगा बैरियर

नई व्यवस्था में वाहनों को टोल कर्मचारी के पास रुकने की जरूरत नहीं होगी। लेन में बूम बैरियर भी नहीं लगाया जाएगा, जिससे वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे। वाहन के गुजरते ही सिस्टम उसकी पहचान करेगा और उसकी श्रेणी के अनुसार टोल राशि तय की जाएगी। इसके बाद संबंधित रकम FASTag से अपने आप काटी जाएगी।


कैमरा और सेंसर करेंगे वाहन की पहचान

बैरियर-लेस टोलिंग के लिए लेन में FASTag रीडर, कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं। FASTag रीडर वाहन की पहचान करेगा, जबकि कैमरे और सेंसर नंबर प्लेट तथा वाहन की कैटेगरी से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे। इन जानकारियों के आधार पर टोल की राशि निर्धारित होगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से होने के कारण वाहन को टोल प्लाजा पर ब्रेक लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।


FASTag में रकम नहीं होने पर ई-चालान

FASTag में पर्याप्त राशि नहीं होने, वाहन का नंबर गलत दर्ज होने या किसी तकनीकी समस्या के कारण तत्काल भुगतान नहीं हो पाने की स्थिति में वाहन मालिक को ई-चालान भेजा जाएगा।


चालान मिलने के बाद 3 दिन के भीतर टोल राशि जमा करनी होगी। तय अवधि में भुगतान नहीं होने पर जुर्माने के साथ रकम वसूल की जाएगी।


समय और ईंधन की होगी बचत

बैरियर-लेस सिस्टम से टोल प्लाजा पर वाहनों की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिलेगी। बार-बार ब्रेक लगाने और फिर वाहन को गति देने की जरूरत घटने से यात्रा का समय कम हो सकता है।


इससे पेट्रोल-डीजल की खपत में भी बचत होगी। टोल लेन में वाहनों का आवागमन सुचारू रहने से ट्रैफिक दबाव घटाने में मदद मिलेगी।


व्यवस्था से जुड़े प्रमुख बदलाव

वाहन को टोल कर्मचारी के पास रुकना नहीं पड़ेगा।

टोल लेन में बूम बैरियर नहीं होगा।

FASTag से शुल्क अपने आप कटेगा।

कैमरे और सेंसर वाहन की पहचान करेंगे।

FASTag में समस्या होने पर ई-चालान भेजा जाएगा।

भुगतान के लिए 3 दिन की समय सीमा होगी।

कर्मचारियों की जरूरत कम होने से संचालन लागत घट सकती है।


यूरोप और जर्मनी में पहले से इस्तेमाल

बैरियर-लेस टोलिंग तकनीक यूरोप और जर्मनी समेत कई विकसित देशों में पहले से इस्तेमाल की जा रही है। भारत में भी कुछ नए एक्सप्रेसवे पर इस तरह की आधुनिक टोल वसूली प्रणाली अपनाई गई है।


मध्यप्रदेश में किसी सड़क पर इस तकनीक की शुरुआत को इस तरह का पहला नवाचार बताया गया है। देश के कुछ अन्य राज्यों में भी बैरियर-लेस टोलिंग व्यवस्था लागू है।


तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों पर नजर

फिलहाल एमपीआरडीसी ने फंदा टोल प्लाजा की सिर्फ एक लेन में इसका ट्रायल शुरू किया है। परीक्षण सफल रहने के बाद 1 जनवरी 2027 से तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में व्यवस्था लागू करने की योजना है। इसका उद्देश्य टोल वसूली के दौरान वाहनों को रोकने की जरूरत खत्म करना और आवागमन को अधिक सुचारू बनाना है।


तकनीक के इस्तेमाल पर PWD का फोकस

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बुधवार को भोपाल स्थित सीएसआईआर-एम्प्री का दौरा किया। उन्होंने कहा कि संस्थान की तकनीकों का इस्तेमाल पीडब्ल्यूडी की परियोजनाओं में ज्यादा किया जाएगा।


मंत्री के मुताबिक, सीएसआईआर-एम्प्री को पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य तकनीक के इस्तेमाल से मजबूत और टिकाऊ सड़कें तैयार करना है।

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