
भोपाल में करीब 1,300 एकड़ शत्रु संपत्ति का रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी तेज हो गई है। जिला प्रशासन को 31 अक्टूबर तक संपत्तियों की सूची तैयार कर शासन को रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके लिए जमीन के स्वामित्व से लेकर बाजार मूल्य तक का सत्यापन किया जाएगा।
राज्य सरकार के निर्देशों के तहत भोपाल समेत मध्य प्रदेश के 11 जिलों में शत्रु संपत्तियों का डिजिटलीकरण और राजस्व दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इस प्रक्रिया में नानी की हवेली और रियाज मंजिल जैसी संपत्तियां भी शामिल हैं, जो भोपाल की सूची में पहले से दर्ज हैं।
मुख्य सचिव के सामने रखी गई भोपाल की स्थिति
सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में भोपाल कलेक्टर ने मुख्य सचिव (CS) के सामने जिले की शत्रु संपत्तियों से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की। प्रशासन को सीमित समय में पहचान और रिकॉर्ड दुरुस्त करने का काम पूरा करना है।
निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, अगले दो सप्ताह में संपत्तियों को चिह्नित कर सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद 31 अक्टूबर तक शासन को रिपोर्ट भेजी जानी है।
11 जिलों के प्रशासन को मिले निर्देश
शत्रु संपत्तियों के प्रबंधन और राजस्व रिकॉर्ड के रखरखाव के लिए जिन जिलों को निर्देश दिए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
- भोपाल
- बैतूल
- डिंडोरी
- जबलपुर
- कटनी
- मंडला
- रतलाम
- सतना
- सीहोर
- सिवनी
इनपुट में भोपाल समेत 11 जिलों का उल्लेख है, लेकिन सूची में भोपाल सहित केवल 10 जिलों के नाम दिए गए हैं। 11वें जिले की पुष्टि आवश्यक है।
जमीन के दस्तावेजों का होगा मिलान
प्रशासन को केवल संपत्तियों की पहचान करके सूची बनाने तक सीमित नहीं रहना है। हर संपत्ति के स्वामित्व, खसरा नंबर और संबंधित राजस्व दस्तावेजों की जांच भी करनी होगी, जिससे रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियां सामने आ सकें।
राजस्व विभाग के दस्तावेजों में इन संपत्तियों को Custodian of Enemy Property for India के नाम से स्पष्ट रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य संपत्तियों की कानूनी स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड को स्पष्ट रखना है।
डिजिटल पोर्टल पर मिलेगी संपत्तियों की जानकारी
निर्देशों के तहत शत्रु संपत्तियों का डिजिटलीकरण करने के साथ ई-मैपिंग और रिमोट सेंसिंग की मदद भी ली जाएगी। डिजिटल रिकॉर्ड में जमीन की स्थिति और उससे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी।
इस प्रक्रिया से प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कौन-सी संपत्तियां विवाद से मुक्त हैं, किन स्थानों पर अतिक्रमण है और कौन-सी संपत्तियां नीलामी के योग्य हैं। संबंधित विवरण डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध कराने की योजना है।
बाजार दर के आधार पर तय होगा संपत्तियों का मूल्य
संपत्तियों की कीमत का आकलन करने के लिए मौजूदा बाजार दरों और जिला पंजीयन कार्यालय की गाइडलाइन दरों का मिलान किया जाएगा। इसके आधार पर प्रत्येक संपत्ति के मूल्य का अधिक सटीक विवरण तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन ने संपत्तियों की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने पर भी जोर दिया है, ताकि अवैध कब्जे या अतिक्रमण की गुंजाइश कम की जा सके। भोपाल में खास तौर पर संपत्तियों की विस्तृत पहचान और मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करने को प्राथमिकता दी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद प्रक्रिया तेज
इनपुट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मुख्यमंत्री को शत्रु संपत्तियों के संबंध में विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद जिलों में संपत्तियों के प्रबंधन और रिकॉर्ड व्यवस्थित करने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन को तय समयसीमा में डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट करने और पूरी रिपोर्ट शासन को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। भोपाल में करीब 1,300 एकड़ संपत्ति का विवरण इस कवायद का प्रमुख हिस्सा होगा।
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