
भोपाल। राजधानी भोपाल से सामने आए पासपोर्ट फर्जीवाड़े ने दस्तावेज सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते पर 40 फर्जी भारतीय पासपोर्ट जारी किए जाने का मामला जांच में सामने आया है।
जांच के अनुसार, बांग्लादेशी नागरिकों ने खुद को बौद्ध अनुयायी बताकर भारतीय पहचान हासिल की और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान की यात्राएं कीं। मामले के बाद इमिग्रेशन ब्रांच ने सभी एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर हाई अलर्ट जारी किया है।
फर्जी पहचान तैयार करने का तरीका
एमपी एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर जाली आधार कार्ड तैयार कराए। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे पैन कार्ड और नगर निगम से जन्म प्रमाण पत्र हासिल किए गए।
इसके बाद तैयार दस्तावेजों का इस्तेमाल पासपोर्ट आवेदन में किया गया। जांच एजेंसियां अब यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क को किस स्तर पर मदद मिली और विदेश यात्राओं का वास्तविक उद्देश्य क्या था।
जांच का दायरा कई जिलों तक पहुंचा
नेटवर्क की कड़ियां तलाशने के लिए एसटीएफ ने अपनी जांच भोपाल से बाहर भी बढ़ाई है। पांच सदस्यीय एसटीएफ टीम असम में बांग्लादेश सीमा तक पहुंची है।
जांच के दायरे में डबरा (ग्वालियर), छिंदवाड़ा और बैतूल भी शामिल हैं। इन चार जिलों में अब तक 70 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट सामने आ चुके हैं।
विदेश यात्राओं पर भी जांच
एसटीएफ को पता चला है कि फर्जी भारतीय पहचान के आधार पर संबंधित लोगों ने कई देशों की यात्रा की। इनमें शामिल हैं:
थाईलैंड
मलेशिया
चीन
श्रीलंका
जापान
एजेंसियां इन यात्राओं के पीछे की वास्तविक वजह और संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं।
इमिग्रेशन सिस्टम में हाई अलर्ट
मामला सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की इमिग्रेशन ब्रांच ने देश के सभी एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर हाई अलर्ट जारी किया है।
अब संदिग्ध लोगों में से कोई भारत में प्रवेश करने या देश से बाहर निकलने का प्रयास करता है, तो संबंधित जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी मिल सकेगी।
एक मोबाइल नंबर से 17 पासपोर्ट आवेदन
डबरा में सामने आए मामले ने दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। यहां 17 संदिग्ध पासपोर्ट आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मिला। एक ही नंबर का बार-बार इस्तेमाल होने के बावजूद आवेदन प्रक्रिया के दौरान यह समानता संदिग्ध क्यों नहीं मानी गई, यह जांच का अहम सवाल बन गया है।
एक पते से लगातार आवेदन, सत्यापन पर सवाल
अन्ना नगर के जिस मठ का पता इस्तेमाल हुआ, उसी पते से अलग-अलग लोगों के नाम पर पासपोर्ट आवेदन किए गए। इसके बावजूद पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान इस पैटर्न की पहचान क्यों नहीं हो सकी, इसकी भी पड़ताल जरूरी हो गई है।
मामले की जांच अब कथित मास्टरमाइंड और स्थानीय स्तर पर सहयोग करने वाले लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर एसटीएफ आगे की कड़ियां जोड़ रही है।
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