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भोपाल में गैस एजेंसियों का बड़ा खेल उजागर, हजारों सिलेंडर गायब और उपभोक्ताओं से लाखों की अवैध वसूली सामने आई

22 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में गैस एजेंसियों का बड़ा खेल उजागर, हजारों सिलेंडर गायब और उपभोक्ताओं से लाखों की अवैध वसूली सामने आई
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल में घरेलू गैस सप्लाई को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दो गैस एजेंसियों की जांच में हजारों सिलेंडर गायब और उपभोक्ताओं से ठगी का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। मामला अब कार्रवाई के अंतिम चरण में पहुंच गया है—और सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने दिन तक यह खेल चलता कैसे रहा।


गैस एजेंसियों के गोदाम में बड़ा खेल, हजारों सिलेंडर गायब

जांच में सामने आया कि दोनों एजेंसियों के साझा गोदाम करीब 36 हजार वर्गफीट क्षेत्र में संचालित हो रहे थे। लेकिन स्टॉक मिलान में भारी गड़बड़ी पकड़ में आई। फीनिक्स एजेंसी में 350 घरेलू, 350 कमर्शियल और 2000 छोटे सिलेंडर गायब पाए गए। वहीं दूसरी एजेंसी में भी 254 भरे सिलेंडर नहीं मिले। इतनी बड़ी संख्या में गायब सिलेंडर यह इशारा कर रहे हैं कि मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी का है—और यहीं से कहानी और गंभीर हो जाती है।


बुकिंग हुई, लेकिन सिलेंडर पहुंचे ही नहीं

जांच रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि जिन उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन बुकिंग की, उन्हें सिलेंडर मिला ही नहीं। मोबाइल पर ‘डिलीवर्ड’ का मैसेज भेज दिया गया, लेकिन हकीकत में सिलेंडर कहीं और बेच दिए गए। जब लोग एजेंसी पहुंचे तो रिकॉर्ड में डिलीवरी दिख रही थी। यानी सीधे-सीधे उपभोक्ताओं के साथ धोखा किया गया—और यह तरीका लंबे समय से अपनाया जा रहा था।


238 रुपए का फर्जी चार्ज, लाखों की वसूली

एजेंसी पर उपभोक्ताओं से जबरन ₹238 सुरक्षा निरीक्षण शुल्क लेने का भी खुलासा हुआ है। यह निरीक्षण घर पर होना चाहिए था, लेकिन बिना जांच किए ही पैसे लेकर बिल जारी कर दिए गए। करीब 5000 उपभोक्ताओं से लगभग ₹10 लाख वसूले गए। इतना ही नहीं, ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर हर महीने करीब ₹2 लाख की अतिरिक्त वसूली का अनुमान भी सामने आया है—जो इस घोटाले की गहराई को दिखाता है।


फर्जी बिलिंग और डिलीवरी सिस्टम में हेरफेर

जांच में यह भी सामने आया कि एक दिन पहले ऑनलाइन बिल जनरेट किए गए, लेकिन अगले दिन ऑफलाइन बिल जारी कर दिए गए। लोगों को घर तक सिलेंडर देने के बजाय एजेंसी के पीछे खड़े ट्रकों से वितरण किया गया। यह पूरा सिस्टम नियमों को दरकिनार कर बनाया गया था, जिससे रिकॉर्ड में सब कुछ सही दिखे लेकिन असल में खेल चलता रहे—और यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।


सप्लाई रोकी गई, ट्रकों की मूवमेंट भी संदिग्ध

रिकॉर्ड के अनुसार डिपो से आने वाले ट्रकों को 2-3 घंटे लगने चाहिए थे, लेकिन कई बार वे 24 घंटे बाद पहुंचे। इस दौरान ट्रक कहां रुके, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कंपनी ने ओटीपी सिस्टम के उल्लंघन पर एजेंसी की सप्लाई भी रोक दी थी—जो बताता है कि गड़बड़ी लंबे समय से नोटिस में थी।


रिटायर्ड अधिकारी और रिश्तेदारों का नाम सामने

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एजेंसियों का संबंध एक रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी और उनके रिश्तेदारों से है। यह तथ्य मामले को और गंभीर बना देता है, क्योंकि सिस्टम की जानकारी रखने वाले लोगों पर ही नियम तोड़ने के आरोप लगे हैं। अब सवाल यह है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल हैं?


अब क्या होगी कार्रवाई? लाइसेंस रद्द तक की तैयारी

खाद्य विभाग ने पूरी जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। करीब 10-12 मामलों में कार्रवाई की सिफारिश की गई है। संभावना है कि एजेंसियों पर जुर्माना, एफआईआर और लाइसेंस निरस्त करने जैसी सख्त कार्रवाई हो सकती है।


अब फैसला प्रशासन के हाथ में है—लेकिन इस खुलासे ने शहर की गैस सप्लाई व्यवस्था पर भरोसे को जरूर झटका दिया है।

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