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भोपाल में फिर लगेगा निवेश का महाकुंभ, GIS 2027 में दोगुने निवेश प्रस्तावों का लक्ष्य

17 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में फिर लगेगा निवेश का महाकुंभ, GIS 2027 में दोगुने निवेश प्रस्तावों का लक्ष्य
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर देश के सबसे बड़े निवेश आयोजनों में शामिल होने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक जनवरी 2027 में दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) आयोजित हो सकती है। इस बार सरकार की नजर पिछली बार से भी अधिक निवेश प्रस्ताव हासिल करने पर है।


उद्योग विभाग ने तेज की तैयारियां

सूत्रों के अनुसार उद्योग विभाग और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने आयोजन की शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछली समिट की तरह इस बार भी देश-विदेश के बड़े उद्योगपतियों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है।


पिछली GIS में मिले थे रिकॉर्ड निवेश प्रस्ताव

फरवरी 2025 में आयोजित पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इसमें रीजनल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान मिले प्रस्ताव भी शामिल थे। सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव अडाणी समूह की ओर से 1.10 लाख करोड़ रुपये का था। अब सरकार को उम्मीद है कि GIS-2027 में यह आंकड़ा और बढ़ेगा।


आयोजन स्थल के लिए कई विकल्पों का निरीक्षण

जानकारी के मुताबिक नई समिट के लिए लाल परेड ग्राउंड, नीलबड़-रातीबड़ क्षेत्र और राष्ट्रीय मानव संग्रहालय परिसर का निरीक्षण किया जा चुका है। अंतिम स्थान का चयन आमंत्रित निवेशकों और उद्योगपतियों की संख्या को ध्यान में रखकर किया जाएगा।


पिछली कमियों से लिया जाएगा सबक

सरकार इस बार आयोजन को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दे रही है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में तकनीकी व्यवस्थाओं और ध्वनि प्रणाली से जुड़ी पिछली बार की समस्याओं पर चर्चा हुई। अधिकारियों को इन कमियों को पहले ही दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।


नए औद्योगिक क्षेत्र से मिलेगा निवेश को बढ़ावा

निवेश आकर्षित करने के लिए MPIDC कोलार रोड स्थित सतगढ़ी के पास 172 एकड़ में नया मल्टी-प्रोडक्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। यहां टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और रेडीमेड गारमेंट्स से जुड़ी उद्योग इकाइयों को बढ़ावा देने की योजना है।


पिछली GIS के सौंदर्यीकरण पर उठे थे सवाल

पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले शहर के सौंदर्यीकरण पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। हालांकि बाद में फाउंटेन और अन्य कार्यों में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। जांच में कई स्थानों पर रिकॉर्ड में दर्ज उपकरण मौके पर नहीं मिले, जबकि कुछ फाउंटेन का अस्तित्व ही नहीं मिला। शिकायत लोकायुक्त तक पहुंचने के बाद जांच में भुगतान और वास्तविक कार्य के बीच अंतर सामने आने की बात भी सामने आई।


सरकार की नजर अब और बड़े निवेश पर

उद्योग विभाग को उम्मीद है कि दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के जरिए मध्य प्रदेश में पहले से अधिक निवेश आकर्षित होगा। यदि प्रस्ताव उम्मीद के मुताबिक मिलते हैं तो प्रदेश में औद्योगिक विकास, रोजगार और नई परियोजनाओं को बड़ी गति मिल सकती है।

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