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भोपाल में Ground Coverage नियम बदलने की तैयारी, पार्किंग की जगह घटने और ट्रैफिक जाम बढ़ने की आशंका

13 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में Ground Coverage नियम बदलने की तैयारी, पार्किंग की जगह घटने और ट्रैफिक जाम बढ़ने की आशंका
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल में भवन निर्माण के नियमों में प्रस्तावित बदलाव से शहर की पार्किंग व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। नगर एवं ग्राम निवेश (T&CP) विभाग ग्राउंड कवरेज की मौजूदा सीमा खत्म करने पर विचार कर रहा है, जिससे प्लॉट के भूतल पर ज्यादा निर्माण का रास्ता खुल सकता है।


यदि जमीन का बड़ा हिस्सा इमारतों के निर्माण में इस्तेमाल होने लगा, तो भवनों के भीतर वाहनों के लिए जगह कम पड़ने की आशंका है। इसका दबाव व्यावसायिक इलाकों की सड़कों और सर्विस रोड पर बढ़ सकता है।


क्या बदलने की तैयारी कर रहा है T&CP विभाग?

मौजूदा नियमों में प्लॉट के आकार के हिसाब से जमीन पर 30% से 60% तक निर्माण की अनुमति दी जाती है। बाकी हिस्से का उपयोग पार्किंग, सेटबैक, बगीचे और हवा-रोशनी के लिए किया जा सकता है।


प्रस्तावित बदलाव में ग्राउंड कवरेज की सीमा समाप्त करने की बात है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो भूतल पर निर्माण का दायरा बढ़ सकता है और प्लॉट का खुला हिस्सा कम हो सकता है।


सड़क पर क्यों बढ़ सकता है पार्किंग का दबाव?

व्यावसायिक इमारतों में आने वाले ग्राहकों और कर्मचारियों के वाहनों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह जरूरी होती है। भवन के भीतर पार्किंग कम होने पर वाहन सड़क किनारे खड़े करने की मजबूरी बढ़ सकती है।


इसका असर मुख्य मार्गों और सर्विस रोड पर दिखाई दे सकता है। पहले से व्यस्त सड़कों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने और जाम की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।


प्लॉट के आकार के हिसाब से कितना निर्माण हो सकता है?

मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग आकार के प्लॉट के लिए ग्राउंड कवरेज की सीमा अलग है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नियम इस प्रकार हैं:


48 से 75 वर्गमीटर: 60%

105 से 200 वर्गमीटर: 50%

200 वर्गमीटर: 41%

216 वर्गमीटर: 42%

288 वर्गमीटर: 40%

360 वर्गमीटर: 35%

405 से 600 वर्गमीटर: 33%

750 वर्गमीटर: 30%


इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिए गए प्लॉट आकारों के लिए भूतल पर निर्माण की अनुमत सीमा अलग-अलग रखी गई है। नियमों में बदलाव होने पर जमीन के खुले हिस्से और पार्किंग की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।


अभी अंतिम फैसला नहीं, जनता से मांगे जा रहे सुझाव

T&CP के संयुक्त संचालक नीरज आनंद लिखार ने बताया कि प्रस्तावित नियमों पर आम लोगों की राय ली जा रही है। उनके अनुसार, प्रक्रिया पूरी होने और सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय किया जाएगा।


इसलिए ग्राउंड कवरेज की सीमा समाप्त होना अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। आगे की स्थिति जनसुझावों, सुनवाई और विभाग के फैसले पर निर्भर करेगी।


ग्राउंड कवरेज क्या होता है?

ग्राउंड कवरेज का मतलब प्लॉट के कुल क्षेत्रफल के उस हिस्से से है, जिस पर जमीन के स्तर यानी भूतल पर इमारत बनाई जा सकती है। इसकी गणना प्लॉट के क्षेत्रफल के प्रतिशत के रूप में होती है।


उदाहरण के लिए, 200 वर्गमीटर के प्लॉट पर यदि 50% ग्राउंड कवरेज की अनुमति है, तो भूतल पर अधिकतम 100 वर्गमीटर में निर्माण किया जा सकता है। शेष जमीन का उपयोग लागू नियमों के अनुसार सेटबैक, पार्किंग, बगीचे और हवा-रोशनी के लिए किया जा सकता है।


भोपाल में प्रस्तावित बदलाव का अंतिम स्वरूप तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि निर्माण की अनुमति और खुले स्थानों से जुड़े नियम किस तरह बदलेंगे।

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