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भोपाल के हलालपुरा पटाखा बाजार पर प्रशासन सख्त, 15 दुकानों को लेकर जारी हुआ आदेश, जानिए आगे क्या होगा

16 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल के हलालपुरा पटाखा बाजार पर प्रशासन सख्त, 15 दुकानों को लेकर जारी हुआ आदेश, जानिए आगे क्या होगा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट में कारोबार करने वाली 15 दुकानों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव के आदेश के मुताबिक, हाईकोर्ट से स्थगन हटने के बाद बाजार को दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।


अदालत का फैसला आने तक पटाखा कारोबारियों को 13 सुरक्षा शर्तों का पालन करना होगा। आदेश तोड़ने पर दुकान मालिक को छह महीने तक की जेल हो सकती है।


15 पटाखा दुकानों को जन सुरक्षा के लिए खतरा माना

बैरागढ़ एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत हलालपुरा की 15 आतिशबाजी दुकानों को लोक नूसेंस घोषित किया है। प्रशासन का यह कदम बाजार में आग लगने की आशंका और आसपास मौजूद आबादी की सुरक्षा से जुड़ा है।


मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में 12 रिट याचिकाएं और 8 अवमानना प्रकरण लंबित हैं। इन मामलों में अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है और स्थगन भी दिया है। स्थगन हटने के बाद दुकानों को दूसरी जगह ले जाने की तैयारी है।


कारोबारियों के लिए 13 शर्तें, उल्लंघन पर जेल का प्रावधान

अदालती कार्यवाही पूरी होने तक दुकानदारों को निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुसार कारोबार करना होगा। एसडीएम ने इन शर्तों का पालन कराने के लिए तहसीलदार, नगर निगम के उपायुक्त और थाना प्रभारी को जिम्मेदारी सौंपी है।


प्रशासन के आदेश में प्रमुख सुरक्षा प्रावधान शामिल हैं:

- विस्फोटक अधिनियम के नियमों का पूरी तरह पालन।

- अग्नि सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा के इंतजाम।

- यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था।

- राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशों का अनुपालन।

- तय डेसीबल सीमा से अधिक आवाज वाले पटाखों और कार्बाइड गन की बिक्री पर रोक।

- अग्नि सुरक्षा की मॉक ड्रिल कराना।

- फायर एनओसी और विद्युत सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र एसडीएम कोर्ट में जमा करना।


इन शर्तों का उल्लंघन करने वाले दुकान मालिक को छह महीने के कारावास का दंड दिया जा सकता है।


12 जून की आग ने बढ़ाई चिंता, पास में पेट्रोल पंप

एसडीएम श्रीवास्तव ने अपने आदेश में 12 जून 2026 की रात सोनी पटाखा दुकान में लगी भीषण आग का उल्लेख किया है। आग के दौरान पास स्थित पेट्रोल पंप भी खतरे की जद में आ गया था।


आदेश में आशंका जताई गई कि यदि यह घटना दिन के समय होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। बाजार में पहले भी आग लगने की घटनाओं का जिक्र किया गया है।


हलालपुरा की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यहां से भोपाल और इंदौर के बीच बसों का संचालन होता है। क्षेत्र में चार्टर बसों का टर्मिनल भी मौजूद है।


वर्ष 2024 की जांच में भी सामने आई थीं खामियां

हरदा की पटाखा फैक्ट्री में वर्ष 2024 में हुए विस्फोट के बाद भोपाल में पटाखा दुकानों, फैक्ट्रियों और गोदामों की जांच कराई गई थी। इस दौरान कुछ स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक पटाखों का स्टॉक मिला था, जबकि अन्य जगहों पर सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी।


उस समय बैरागढ़ के तत्कालीन एसडीएम आदित्य जैन ने हलालपुरा मार्केट को खतरनाक बताया था। जांच के बाद कुछ दुकानों को सील भी किया गया था।


जांच रिपोर्ट में बाजार के आसपास रिहायशी इलाके और मैरिज गार्डन होने का उल्लेख था। दुकानों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं होने, आने-जाने के लिए केवल एक रास्ता होने और फायर फाइटर व दमकल की व्यवस्था की कमी को भी जोखिम के कारणों में गिनाया गया था।


पेट्रोल पंप, शादी हॉल और रिहायशी इलाके भी चिंता का कारण

वर्ष 2024 की रिपोर्ट में भोपाल-इंदौर मुख्य मार्ग से लगी सोनी पटाखा, कालू पटाखा और दीपक पटाखा दुकानों का उल्लेख किया गया था। आसपास होटल, शादी हॉल और पेट्रोल पंप होने के कारण दुर्घटना की आशंका जताई गई थी।


राज पटाखा और आरके पटाखा दुकानों के साथ चार गोदामों के रिहायशी क्षेत्र में होने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज थी। कुछ मैरिज गार्डन इन दुकानों के नजदीक स्थित हैं, जहां शादियों के दौरान आतिशबाजी होती है।


तत्कालीन एसडीएम आदित्य जैन ने अपनी रिपोर्ट में सभी दुकानों और गोदामों को शहरी सीमा से बाहर गैर-रिहायशी क्षेत्र में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। साथ ही नियमित फायर ऑडिट और अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों से दुकानों की जांच कराने की जरूरत बताई थी।


वर्ष 1997 से पहले कबाड़खाना में था पटाखा बाजार

हलालपुरा में पटाखा कारोबार शुरू होने की वजह भी एक पुरानी दुर्घटना रही है। वर्ष 1997 से पहले भोपाल के कबाड़खाना इलाके में थोक पटाखा बाजार संचालित होता था। वहां हादसे के बाद प्रशासन ने कारोबारियों को हलालपुरा में जगह दी थी।


उस समय इस इलाके के आसपास आबादी नहीं थी। अब यहां रिहायशी बस्तियां, कॉम्प्लेक्स और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पेट्रोल पंप की मौजूदगी भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है।


प्रशासन के मौजूदा आदेश के तहत तत्काल सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी होगा, जबकि दुकानों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का कदम हाईकोर्ट से स्थगन हटने के बाद उठाया जाएगा।

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