
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में होली पर्व को लेकर तैयारियां चरम पर पहुंच गई हैं। इस वर्ष शहर में 1500 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन की योजना बनाई गई है। नगर निगम और प्रशासन की निगरानी में वार्ड स्तर पर व्यवस्थाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं।
2 मार्च की रात होगा होलिका दहन
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार होलिका दहन 2 मार्च की देर रात किया जाएगा।
क्या है कारण?
हाल ही में आयोजित वेब संगोष्ठी में देशभर के पंचांग विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 2 मार्च की रात 2 बजे के बाद, जब भद्रा पुच्छकाल समाप्त होगा, तभी होलिका दहन शुभ रहेगा।
ज्योतिष मठ संस्थान के संचालक पंडित विनोद गौतम के अनुसार,
3 मार्च की रात तक पूर्णिमा समाप्त होकर प्रतिपदा तिथि लग जाएगी।
उस दिन ग्रहण का सूतक प्रभावी रहेगा।
शास्त्रों में ग्रहणकाल की रात को अशुभ माना गया है।
इसी कारण 2 मार्च की रात को ही अग्नि प्रज्वलन का निर्णय लिया गया है।
शहरभर में 1500 से ज्यादा स्थानों पर होगी अग्नि प्रज्वलि
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार इस बार राजधानी में 1500 से अधिक जगहों पर होलिका दहन प्रस्तावित है।
कई स्थानों पर पारंपरिक समयानुसार कार्यक्रम होंगे, जबकि प्रमुख चौक-चौराहों पर देर रात निर्धारित मुहूर्त में सामूहिक होलिका दहन किया जाएगा।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और साफ-सफाई के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
गोकाष्ठ से पर्यावरण मित्र होली
इस वर्ष भी पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। लकड़ी की जगह गोकाष्ठ (गोबर से बने काष्ठ) से होलिका दहन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दैनिक भास्कर समूह और गोकाष्ठ संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण समिति द्वारा शहर में 47 विक्रय केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां से नागरिक गोकाष्ठ खरीद सकते हैं।
गोकाष्ठ के फायदे:
पेड़ों की कटाई में कमी
कम धुआं और प्रदूषण
गोवंश संरक्षण को प्रोत्साहन
पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यह पहल पारंपरिक आस्था और प्रकृति संरक्षण का संतुलित मॉडल है।
4 मार्च को रंगोत्सव, निकलेंगे भव्य जुलूस
4 मार्च को रंगों का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। शहर के पुराने और नए इलाकों में चल समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
प्रमुख आयोजन स्थल:
दयानंद चौक
जुमेराती
करोद
कोलार
संत नगर
भेल क्षेत्र
हिंदू उत्सव समिति की ओर से दयानंद चौक से पारंपरिक होली चल समारोह निकाला जाएगा। इसमें राधा-कृष्ण और भोलेनाथ की सजीव झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगी।
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