
भोपाल। राजधानी भोपाल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। जर्जर स्कूलों की जानकारी मांगने पर अधिकारी जवाब तक नहीं दे पाए। अब सवाल उठ रहा है—बच्चों की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है?
बैठक में अफसरों की तैयारी पर उठे सवाल
भोपाल कलेक्टोरेट में हुई शिक्षा समिति की बैठक में जब जर्जर स्कूलों की सूची मांगी गई, तो जिम्मेदार अधिकारी इसे पेश ही नहीं कर सके। यह स्थिति खुद प्रशासन की तैयारी पर सवाल खड़े करती है। जब डेटा ही उपलब्ध नहीं है, तो सुधार कैसे होगा।
विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप
समिति अध्यक्ष मोहन सिंह जाट और अन्य सदस्यों ने साफ कहा कि निरीक्षण के दौरान स्कूलों में चल रहे काम की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। कई जगह काम अधूरा है और जहां पूरा हुआ, वहां भी स्तर संतोषजनक नहीं है। ऐसे में बच्चों के भविष्य के साथ समझौता होने की आशंका बढ़ गई है।
इंजीनियर को हटाने पर बनी सहमति
बैठक में सहायक यंत्री नरेश भटकारिया की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे। समय पर काम पूरा न करना और गुणवत्ता में कमी बड़ी वजह रही। इसी के चलते बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने संबंधित इंजीनियर को हटाने पर सहमति जताई। अब इस फैसले पर अमल कब होगा, इस पर सबकी नजर है।
खितवास और मेंगराकलां स्कूल बने उदाहरण
खितवास के हाईस्कूल में लापरवाही का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। वहीं मेंगराकलां के स्कूल की हालत इतनी खराब बताई गई कि दीवारों से पानी रिस रहा है। ऐसी स्थिति में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है, यह बड़ा सवाल बन गया है।
ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की मांग
समिति के सदस्यों ने एकमत होकर कहा कि निर्माण में गड़बड़ी साफ दिख रही है और इसमें सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। इसी के चलते ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। अब देखना होगा कि जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होती है और क्या व्यवस्था में सुधार आता है।
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