
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को देशभर के साहित्यकार और लोककथाकार एक मंच पर जुटेंगे। मौका है लघुकथा शोध केंद्र के राष्ट्रीय अधिवेशन का, जहां साहित्य के वर्तमान और भविष्य पर मंथन होगा। कार्यक्रम से पहले कई वरिष्ठ साहित्यकारों ने न्यूज़ वर्ल्ड से खास बातचीत में साहित्य, युवाओं और समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
साहित्य समाज को जागरूक करने का सबसे बड़ा माध्यम: डॉ. सुषमा सिंह
साहित्यकार डॉ. सुषमा सिंह ने कहा कि साहित्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समाज को जागरूक करना और सामाजिक विसंगतियों को दूर करना है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में विदेशी संस्कृति के दुष्प्रभावों के प्रति समाज को सचेत करना भी साहित्य की अहम भूमिका है। उन्होंने विश्वास जताया कि साहित्य और किताबों का महत्व कभी समाप्त नहीं होगा, क्योंकि साहित्य हर दौर में समाज का मार्गदर्शन करता है।
ऑनलाइन शिक्षा के चलते किताबों से बढ़ रही दूरी: डॉ. मिथलेश दीक्षित
साहित्यकार डॉ. मिथलेश दीक्षित ने कहा कि आज की ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था के कारण युवाओं की निर्भरता मोबाइल और लैपटॉप पर बढ़ गई है, जिससे किताबों के प्रति उनका रुझान लगातार कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार और शिक्षक युवाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन साहित्य की किताबें युवाओं तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रही हैं। उनके अनुसार, एक अच्छे लेखक की पहचान उसके विचारों से होती है और वही विचार समाज को सकारात्मक दिशा देते हैं।
प्रयास ही सफलता की पहली सीढ़ी है: अनीता राकेश
साहित्यकार अनीता राकेश ने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए शिक्षा और साहित्य दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जीवन में सफलता नहीं मिलती, लेकिन ईमानदार प्रयास सबसे बड़ी उपलब्धि होता है और उसी से संतोष सीखना चाहिए। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रभाव, समाजभाव, मानवता और अच्छे संस्कारों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यही गुण भविष्य के साहित्यकारों की सबसे बड़ी पहचान बनेंगे।
देशभर के साहित्यकारों की मौजूदगी में भोपाल में होने वाला यह अधिवेशन केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि साहित्य और समाज के भविष्य पर गंभीर मंथन का मंच भी बनेगा। देखना होगा कि यहां से निकलने वाले विचार नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में कितने प्रभावी साबित होते हैं।
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