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भोपाल में लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट का रुख, मॉल-होटल संचालकों से मांगे गए वैध दस्तावेज

10 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट का रुख, मॉल-होटल संचालकों से मांगे गए वैध दस्तावेज
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल के आवासीय और लो-डेंसिटी इलाकों में नियमों से इतर हुए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों की वैधानिकता अब जांच के दायरे में है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है।


नगर निगम भोपाल इन दस्तावेजों और संचालकों के जवाबों की कानून के मुताबिक जांच करेगा। उधर, लो-डेंसिटी इलाकों में तय सीमा से कई गुना अधिक निर्माण के मामलों के बीच मास्टर प्लान के जरिए उन्हें नियमित करने की कवायद ने प्लान के ड्राफ्ट को फिर उलझा दिया है।


2005 के मास्टर प्लान की सीमा से कई गुना निर्माण

भोपाल के जिन इलाकों को 2005 के मास्टर प्लान में लो-डेंसिटी क्षेत्र रखा गया था, वहां निर्माण की सीमा निर्धारित है। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर मकान, बंगले, कॉलोनियां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो चुके हैं।


नगर निगम की ओर से नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई चल रही है। इसी दौरान इन निर्माणों को मास्टर प्लान के माध्यम से नियमित करने का विकल्प तलाशा जा रहा है।


15 दिन से चल रही अफसरों की बैठकें

लो-डेंसिटी क्षेत्रों को नियमित करने के मुद्दे पर टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के अधिकारी पिछले 15 दिनों से बैठकें कर रहे हैं।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवासीय परिसरों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कराने की कार्रवाई हो रही है। दूसरी तरफ संबंधित पक्ष भी मास्टर प्लान लागू करने की मांग कर रहे हैं।


लो-डेंसिटी क्षेत्र में आखिर कितनी है निर्माण सीमा?

ग्राम बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ और मिंडोरी को लो-डेंसिटी क्षेत्र निर्धारित किया गया है। यहां 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर की डेंसिटी तय है।


निर्माण के लिए न्यूनतम 1000 वर्गमीटर यानी 10 हजार वर्गफीट जमीन जरूरी है। नियम के अनुसार यहां 0.06 एफएआर निर्धारित है।


यानी 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर अधिकतम 600 वर्गफीट निर्माण की अनुमति है। जमीन के कुल क्षेत्रफल के हिसाब से निर्मित हिस्सा छह फीसदी से अधिक नहीं हो सकता।


कई इलाकों में 600 की जगह 6000 से 8000 वर्गफीट निर्माण

मौजूदा स्थिति में निर्धारित सीमा और वास्तविक निर्माण के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। कुछ लो-डेंसिटी क्षेत्रों में 600 वर्गफीट की अनुमति के मुकाबले 6000 से 8000 वर्गफीट तक निर्माण हो चुका है।


कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास अंदर की ओर बनी वीआईपी कॉलोनी में भी इसी तरह का मामला सामने आया, जहां 600 वर्गफीट की सीमा के मुकाबले करीब 6000 वर्गफीट के बंगले बनाए गए। यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है।


चार इमली से केरवा डेम तक ऐसे मामले

लो-डेंसिटी नियमों के बावजूद कई हिस्सों में बड़े निर्माण और कॉलोनियों का विकास हुआ है।

- चार इमली और श्यामला हिल्स में अवैध रूप से बंगले बने।

- नरसिंहगढ़ रोड के लो-डेंसिटी क्षेत्र में 12 बड़ी कॉलोनियां विकसित हो गईं।

- मिंडोरी और उससे जुड़े इलाकों में बड़े मकान और रेस्टोरेंट तैयार हो गए।

- केरवा डेम से लगी जमीन लो-डेंसिटी क्षेत्र में है, लेकिन वहां जाने वाली सड़क के किनारे अवैध कॉलोनियां विकसित हो गईं।


मॉल-होटल और व्यावसायिक गतिविधियों के दस्तावेज होंगे जांच के दायरे में

आवासीय क्षेत्रों में संचालित मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति और वैधानिकता की जांच नगर निगम भोपाल करेगा। सोमवार को हाईकोर्ट में इस विषय से जुड़ी 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। मंगलवार को दस नंबर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुनी गईं।


शो-कॉज नोटिस से संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए एकलपीठ ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाबों की कानूनी तरीके से जांच करने को कहा। निगम को कारण बताते हुए आदेश पारित करना होगा।


मकान तोड़ने पर रोक बरकरार, 15 सितंबर को अगली सुनवाई

मकानों को तोड़े जाने से जुड़े मामले में पक्षों की दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। हाईकोर्ट ने फिलहाल मकान तोड़ने पर लगी रोक को जारी रखा है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है।


रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया

हाईकोर्ट के रुख को स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आवासीय इलाकों के संरक्षण की दिशा में अहम कदम बताया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के मुताबिक अब अनुमति का हवाला देकर मामलों को लंबा खींचने की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नगर निगम के सामने यह साबित करने की जिम्मेदारी है कि नियमों का इस्तेमाल आम नागरिक और प्रभावशाली व्यक्ति, दोनों के लिए समान तरीके से होता है।


ट्रैफिक, पार्किंग और शोर को लेकर रहवासियों की चिंता

रहवासी लवनीश भाटी और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने आवासीय इलाकों में बढ़ी व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई है। उनके अनुसार इन क्षेत्रों में ट्रैफिक, पार्किंग, अत्यधिक शोर और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां लंबे समय से बनी हुई हैं। रहवासियों का कहना है कि वे वर्षों से इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर पर्याप्त सुनवाई नहीं हुई।


मास्टर प्लान के जरिए समाधान की कोशिश ने बढ़ाई पेचीदगी

भोपाल के लो-डेंसिटी इलाकों में पहले से मौजूद बड़े निर्माणों को नियमित करने की कोशिश और कोर्ट के निर्देश के बाद चल रही कार्रवाई के बीच मास्टर प्लान का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के स्तर पर चल रही बैठकों का मकसद लो-डेंसिटी क्षेत्रों के लिए रास्ता तलाशना है। इसी वजह से मास्टर प्लान का ड्राफ्ट दोबारा अटक गया है।

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