
भोपाल में पिछले करीब 3 महीनों से जारी LPG संकट के बीच अब प्रशासन ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। जिन इलाकों में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की लाइन पहुंच चुकी है, वहां भविष्य में घरेलू LPG सिलेंडर की सुविधा बंद की जाएगी। इसके लिए चरणबद्ध योजना तैयार कर ली गई है।
किन इलाकों में पहले लागू होगा नया प्लान?
खाद्य विभाग के अनुसार, थिंक गैस कंपनी ने मिसरोद से लेकर होशंगाबाद रोड के दोनों ओर कई इलाकों में भूमिगत गैस पाइपलाइन बिछा दी है। बावड़ियाकलां, सलैया, अयोध्या बायपास, अवधपुरी, साकेत नगर समेत कई कॉलोनियों में PNG कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जबकि चार इमली में काम जारी है। शुरुआत में प्रशासन ने चार बड़ी कॉलोनियों को प्राथमिकता सूची में रखा है। इनमें केराल केनसिप, सौम्या पार्कलैंड, सागर लेक व्यू होम्स और आकृति ग्रीन शामिल हैं। इन कॉलोनियों में 100% PNG कनेक्शन पूरे होने के बाद अगली कॉलोनियों में काम शुरू होगा।
172 कॉलोनियों तक पहुंची गैस पाइपलाइन
फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के मुताबिक, थिंक गैस कंपनी ने अब तक 172 कॉलोनियों के सामने गैस पाइपलाइन बिछा दी है। कई इलाकों के लोग PNG कनेक्शन के लिए आवेदन भी कर रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि एक साथ पूरे शहर में काम करने के बजाय कुछ चुनिंदा कॉलोनियों में पहले 100 प्रतिशत कनेक्शन पूरे किए जाएं, ताकि योजना तेजी से लागू हो सके।
90 दिन में लेना होगा PNG कनेक्शन
सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार, जिन इलाकों में PNG पाइपलाइन बिछ जाएगी, वहां रहने वाले उपभोक्ताओं को 90 दिनों के भीतर PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। यदि तय समय में उपभोक्ता PNG नहीं लेते हैं, तो उनका LPG कनेक्शन बंद किया जा सकता है। इसका उद्देश्य सिलेंडरों पर निर्भरता कम करना और गैस आपूर्ति को स्थायी बनाना है।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से घरेलू गैस सिलेंडरों की भारी कमी बनी हुई है। भोपाल में हर दिन 12 से 14 हजार सिलेंडरों की बुकिंग हो रही थी, जबकि सप्लाई केवल 9 से 10 हजार सिलेंडरों की ही हो पा रही थी। इस कमी के कारण आम लोगों के साथ-साथ कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को भी गैस सिलेंडर मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी संकट के बाद प्रशासन ने PNG नेटवर्क के विस्तार को प्राथमिकता देने का फैसला किया।
वीआईपी इलाकों में भी पहुंचेगी पाइप गैस
भोपाल के सबसे वीआईपी इलाके चार इमली और 74 बंगला में भी भूमिगत गैस पाइपलाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। इन इलाकों में प्रदेश के 75% से अधिक मंत्री, वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के सरकारी आवास हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अधिकांश हिस्से में पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है और जल्द ही यहां भी PNG कनेक्शन शुरू कर दिए जाएंगे।
होटल और बड़े संस्थानों को भी मिलेगा PNG
खाद्य विभाग ने केवल घरों तक ही नहीं, बल्कि होटल, रेस्टोरेंट, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बड़ी इमारतों को भी PNG नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई है। इससे व्यावसायिक गैस खपत भी सिलेंडर से पाइप गैस की ओर शिफ्ट होगी।
केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन में क्या बदला?
केंद्र सरकार ने अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नई व्यवस्था लागू की है, ताकि देशभर में गैस पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो सके।
नई व्यवस्था के तहत:
RWA और हाउसिंग सोसायटी को पाइपलाइन के लिए 3 दिन में मंजूरी देनी होगी।
छोटे नेटवर्क के लिए 10 दिन और बड़े प्रोजेक्ट के लिए 60 दिन में सरकारी मंजूरी अनिवार्य होगी।
तय समय में जवाब नहीं मिलने पर ऑटोमैटिक (डीम्ड) क्लियरेंस माना जाएगा।
निजी जमीन से पाइपलाइन गुजरने पर मुआवजे का तय फॉर्मूला लागू होगा और विवाद होने पर जिला कलेक्टर फैसला करेंगे।
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
PNG लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को बार-बार सिलेंडर बुक कराने या गैस खत्म होने की चिंता नहीं रहेगी। लगातार पाइपलाइन से गैस सप्लाई मिलती रहेगी।
हालांकि, जो उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार LPG सिलेंडर का उपयोग करना चाहते हैं, उनके लिए विकल्प पहले की तुलना में सीमित हो सकते हैं। आने वाले समय में भोपाल के और भी कई इलाकों में यही व्यवस्था लागू किए जाने की तैयारी है।
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