
महिला आरक्षण बिल पर सियासत अब और तेज हो गई है। भोपाल में भाजपा महिला मोर्चा ने जन आक्रोश महिला पदयात्रा निकालकर विपक्ष के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। इस पदयात्रा ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
एमवीएम ग्राउंड से निकली पदयात्रा
राजधानी के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से यह पदयात्रा शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की खास बात रही कि इसमें 6 विशेष रथ तैयार किए गए, जिनके साथ पैदल मार्च भी किया गया। इस आयोजन को महिला शक्ति के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
सीएम Mohan Yadav की मौजूदगी
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav भी शामिल हुए और महिला सशक्तिकरण के समर्थन में मंच से संदेश दिया। उनके साथ मंत्री Nirmala Bhuria, Krishna Gaur समेत कई महिला जनप्रतिनिधि मौजूद रहीं। इससे साफ संकेत मिला कि पार्टी इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठा रही है।
महिला आरक्षण बिल क्यों बना मुद्दा?
दरअसल, 17 अप्रैल को लोकसभा में पेश 131वां संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका था। इसमें लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव था। लेकिन जरूरी 352 वोट नहीं मिलने के कारण यह बिल अटक गया—और यहीं से सियासत तेज हो गई।
बीजेपी का आरोप: महिलाओं का अपमान
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष Ashwini Paranjpe ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिल गिरने पर जश्न मनाना महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। उनका साफ संदेश था—“मातृशक्ति इसका जवाब देगी, अब याचना नहीं रण होगा।”
क्या आगे और बढ़ेगा राजनीतिक टकराव?
इस पदयात्रा के बाद यह साफ हो गया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक एजेंडा बनने वाला है। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं, और इसका असर आने वाले चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।
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