
भोपाल। भोपाल के मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में आवासीय इलाकों में कारोबार से जुड़ा मार्केट स्ट्रीट प्रावधान चर्चा में है। 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी मुख्य सड़कों के किनारे स्थित कुछ आवासीय प्लॉटों पर व्यावसायिक गतिविधियों को अनुमति देने का रास्ता प्रस्तावित किया गया है।
इसका दायरा अरेरा कॉलोनी, अवधपुरी, गुलमोहर, शाहपुरा, कोलार, संतनगर और करोद समेत शहर के 80 से अधिक क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। ड्राफ्ट पर दावे-आपत्तियां और सुझाव 25 अक्टूबर तक लिए जाने हैं।
क्या है मार्केट स्ट्रीट का प्रस्ताव
ड्राफ्ट के मुताबिक जिन प्रमुख सड़कों की चौड़ाई 18 मीटर या उससे ज्यादा है और जहां अवैध निर्माण के शमन से जुड़े अधिकांश मामले निपट चुके हैं, उन्हें सरकार विचार-विमर्श के बाद मार्केट स्ट्रीट घोषित कर सकती है।
ऐसी सड़क अधिसूचित होने पर उससे लगे आवासीय प्लॉट पर व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति मिल सकेगी। यह अनुमति मुख्य सड़क से सटे मूल प्लॉट की गहराई तक सीमित रहेगी।
सरकार और अधिकारियों के विवेक पर भी जोर
प्रस्ताव में यह भी बात सामने आती है कि यदि किसी चौड़ी सड़क के किनारे कई आवासीय मकानों में पहले से कारोबार हो रहा है, तो बचे हुए मकानों को भी व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। मार्केट स्ट्रीट का दर्जा मिलने के बाद संबंधित सड़कों को सरकार अधिसूचना के जरिए वैधानिक स्वरूप दे सकती है।
विशेषज्ञ ने गिनाईं संभावित चुनौतियां
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेस एंड अर्बन मैनेजमेंट के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एचएम मिश्रा ने मार्केट स्ट्रीट की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट करने की जरूरत बताई है। उनके मुताबिक आवासीय क्षेत्र में चल रही दुकानों वाले हिस्से को पूरी तरह बाजार क्षेत्र में बदलने से वाहनों की संख्या, जाम, पार्किंग, शोर और भीड़ बढ़ सकती है। इसका असर आसपास रहने वाले परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों की निजता पर पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
बढ़ सकता है बुनियादी सुविधाओं पर दबाव
मार्केट गतिविधियों के विस्तार से पानी की खपत, बिजली की मांग और कचरा प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की बात भी कही गई है। सड़क किनारे जमीनों की कीमत बढ़ने के साथ पीछे की अपेक्षाकृत छोटी गलियों में कारोबार फैलने और वहां शांति व सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
25 अक्टूबर तक दे सकते हैं आपत्ति-सुझाव
भोपाल मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट पर 25 अक्टूबर तक दावे, आपत्तियां और सुझाव देने की समयसीमा है। लोग ड्राफ्ट, नक्शे और खसरे देखने के लिए टीएंडसीपी कार्यालय, कलेक्ट्रेट और संभागायुक्त कार्यालय पहुंच रहे हैं। ड्राफ्ट जारी होने के तीन दिन बाद भी टीएंडसीपी में खसरों के पैनल नहीं लगाए गए थे और केवल दो नक्शे प्रदर्शित किए गए थे। लोगों को इन नक्शों को समझने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई है।
ऑनलाइन सुनवाई पर भी उठे सवाल
आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया में ऑनलाइन सुनवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लोगों का कहना है कि कोरोना काल जैसी परिस्थितियां अब नहीं हैं और ऑफलाइन सुनवाई में अपनी बात बेहतर तरीके से रखी जा सकती है। टीएंडसीपी की वेबसाइट पर आपत्ति दर्ज करने के लिए अलग विंडो खोलने का प्रावधान किया जा रहा है।
सब सेक्टर रोड की चौड़ाई भी बदली
ड्राफ्ट में स्थानीय सड़कों को सब सेक्टर रोड के रूप में शामिल किया गया है। इनकी प्रस्तावित चौड़ाई 15 से 25 मीटर रखी गई है। पिछले प्लान में यही सड़कें 12 से 18 मीटर चौड़ी थीं। इस बदलाव को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान होने वाली तोड़फोड़ और सड़क किनारे मौजूद व्यावसायिक निर्माणों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
मिक्स्ड लैंडयूज पर आर्किटेक्ट ने रखी राय
आर्किटेक्ट-प्लानर राजेश चौरसिया ने मास्टर प्लान में बदलाव की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि मिक्स्ड लैंडयूज होना चाहिए, लेकिन इसके साथ छोटे प्लॉट, अधोसंरचना और आवासीय-व्यावसायिक गतिविधियों के बीच संभावित टकराव से निपटने के लिए स्पष्ट प्रावधान भी जरूरी हैं।
बाघ भ्रमण क्षेत्र की जमीन पर पर्यावरण विशेषज्ञ की आपत्ति
बाघ संरक्षण और पर्यावरण विशेषज्ञ प्रभाष जेटली ने ग्राम बैरागढ़ और दौलतपुर की 425 हेक्टेयर जमीन का मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार यह जमीन राजस्व जंगल थी और पिछले साल ही वन विभाग को ट्रांसफर की गई।
उन्होंने चंदनपुरा की 357 हेक्टेयर जमीन का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों क्षेत्रों को मिलाकर करीब 1,200 एकड़ का बाघ भ्रमण क्षेत्र बनता है। उनके मुताबिक यहां 60 मीटर और 24 मीटर तक की सड़कें तय किए जाने से मानव-बाघ संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
जेटली ने बताया कि उन्होंने इस विषय में एनटीसीए को फोन पर जानकारी देने के बाद ईमेल के जरिए भी अवगत कराया है।
याचिकाकर्ता ने नियमों के पालन पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता लवनीश भाटी ने ड्राफ्ट में टीएंडसीपी के नियमों और प्रावधानों का पालन करने वालों के हितों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 2005 में तय आवासीय क्षेत्र के रीडेंसिफिकेशन को लेकर सड़कों की चौड़ाई में अलग-अलग बदलाव किए गए हैं। उनके अनुसार इससे कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने की मंशा दिखाई देती है और आवासीय क्षेत्रों की शांति को प्राथमिकता नहीं दी गई।
रहवासी बोले- गुलमोहर में पहले से बढ़ी परेशानी
गुलमोहर समिति के अध्यक्ष ललीत यावय ने कॉलोनी की मौजूदा स्थिति का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक 9 मीटर की सड़क पर होटल संचालित हो रहे हैं और करीब 1,800 घरों वाली कॉलोनी में रहवासियों को परेशानी हो रही है।
उन्होंने आवासीय प्लॉटों में अस्पताल, घरों में होटल और रेस्टोरेंट संचालित होने तथा रोजाना पार्किंग और अन्य विवादों की बात कही। उनके अनुसार असामाजिक तत्वों की आवाजाही की शिकायतें भी हैं।
ललीत यावय ने कहा कि मास्टर प्लान में ऐसी गतिविधियों को रोकने के स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए और 80 फीसदी या इससे चौड़ी सड़कों के किनारे प्रावधान किए जाने की बात रखी। उन्होंने मौजूदा ड्राफ्ट में सुधार की जरूरत बताई।
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